मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता ही आत्महत्या रोकथाम की पहली सीढ़ी : प्रो. ललित कुमार मिश्र
आईजीएनटीयू में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता रैली, मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और विशेष व्याख्यान का आयोजन
अमरकंटक, 10 सितंबर 2026। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के मनोविज्ञान विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आत्महत्या की रोकथाम के लिए विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर जागरूकता रैली, मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग तथा विभागीय व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के तहत मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ललित कुमार मिश्र ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न विभागों, प्रशासनिक भवन और अन्य सार्वजनिक स्थलों से होकर गुजरी।
इस दौरान विद्यार्थियों ने पोस्टर, पंपलेट और प्रभावशाली नारों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, तनाव एवं मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करने तथा आत्महत्या की रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया।
समय पर सहयोग से बचाई जा सकती है जिंदगी
जागरूकता अभियान के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि मानसिक तनाव, अकेलापन, निराशा अथवा अन्य मनोवैज्ञानिक परेशानियों से गुजर रहे व्यक्ति को समय पर भावनात्मक सहयोग और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार उदासी या सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
अभियान के अंतर्गत मनोविज्ञान विभाग के परामर्श केंद्र द्वारा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न समस्याओं की स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा गूगल फॉर्म के माध्यम से विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में मानसिक रूप से संवेदनशील विद्यार्थियों की पहचान करने का प्रयास किया गया, ताकि आवश्यकता के अनुसार उन्हें समय पर परामर्श एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
विद्यार्थी चेतावनी संकेतों को पहचानें : प्रो. मिश्र
कार्यक्रम के दूसरे चरण में विभागीय व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. ललित कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मनोविज्ञान के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें मानसिक तनाव, विषाद अथवा अन्य मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों से गुजर रहे अपने मित्रों एवं साथियों के व्यवहार में दिखाई देने वाले चेतावनी संकेतों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी बात को गंभीरता से सुनना और आवश्यकता पड़ने पर उसे विशेषज्ञ की सहायता लेने के लिए प्रेरित करना बेहद महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और समय पर सहयोग आत्महत्या की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रो. मिश्र ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल किसी एक व्यक्ति, परिवार या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पूरे समाज को संवेदनशील और जागरूक होना आवश्यक है। मानसिक संकट से जूझ रहे व्यक्ति के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, उसकी बात को ध्यानपूर्वक सुनना और उसे अकेला महसूस न होने देना महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है।
तनाव और विषाद को समझना जरूरी
कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ. प्रज्ञेश कुमार मिश्र, श्री आर्ष ओजस पराशर पाण्डेय एवं डॉ. अभय प्रताप सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव एवं विषाद के लक्षणों की पहचान और समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता प्राप्त करने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही महत्वपूर्ण है। मानसिक परेशानियों को छिपाने या उन्हें कमजोरी समझने के बजाय समय रहते परिवार, मित्रों, शिक्षक, परामर्शदाता अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेना चाहिए।
विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में विभागीय शोधार्थी हर्षित मणि त्रिपाठी, आयुष जैन, इलियास बादशाह एवं नीरज सहित स्नातक एवं परास्नातक स्तर के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। जागरूकता रैली और अन्य गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता विकसित करना, मानसिक संकट के संकेतों को समझने की क्षमता बढ़ाना तथा जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहयोग पहुंचाने की भावना विकसित करना रहा।
आईजीएनटीयू के मनोविज्ञान विभाग की यह पहल विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुले संवाद को प्रोत्साहित करने और आत्महत्या की रोकथाम को सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।



































































