पत्रकारों की सुरक्षा पर अब ठोस कानून जरूरी, ग्रामीण पत्रकारों की चुनौतियां गंभीर : चैतन्य मिश्रा

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पत्रकारों की सुरक्षा पर अब ठोस कानून जरूरी, ग्रामीण पत्रकारों की चुनौतियां गंभीर : चैतन्य मिश्रा

जबलपुर पत्रकार अधिवेशन में अनूपपुर का प्रभावी प्रतिनिधित्व, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

अधिमान्यता की अवधि 20 से घटाकर 10 वर्ष करने, स्वास्थ्य बीमा 10 लाख, श्रद्धा निधि की आयु सीमा 58 वर्ष करने, आवास, प्रेस क्लब और यात्रा रियायत बहाल करने सहित उठीं कई मांगें

अनूपपुर। पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान और सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के तत्वावधान में रविवार को जबलपुर के विजयनगर स्थित कचनार क्लब में प्रदेश स्तरीय पत्रकार अधिवेशन आयोजित किया गया। अधिवेशन में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकारों ने सहभागिता की और पत्रकारिता के समक्ष उत्पन्न हो रही चुनौतियों, विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों की सुरक्षा तथा शासन स्तर पर लंबित मांगों को लेकर व्यापक मंथन किया।

अधिवेशन के दौरान पत्रकारों की विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह, जबलपुर लोकसभा सांसद आशीष दुबे, जबलपुर उत्तर विधानसभा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे तथा राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के संरक्षक एवं मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रेषित किया गया।

पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चैतन्य मिश्रा ने उठाई आवाज

अधिवेशन में अनूपपुर जिले का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं संभागीय प्रभारी वरिष्ठ पत्रकार राजेश शुक्ला तथा संभागीय अध्यक्ष चैतन्य मिश्रा ने किया। इस दौरान संभागीय अध्यक्ष चैतन्य मिश्रा ने मंच से पत्रकारों की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्रकार समाज और शासन के बीच सेतु का कार्य करते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद भ्रष्टाचार, अव्यवस्था, प्रशासनिक कमियों तथा आम जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हैं। इस दौरान उन्हें स्थानीय स्तर पर दबाव, धमकी और असुरक्षा जैसी परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है।

चैतन्य मिश्रा ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा को केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए शासन को ठोस, प्रभावी और व्यवहारिक कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था लागू करनी चाहिए। ग्रामीण पत्रकारों को अपने दायित्वों का निर्वहन करते समय किसी प्रकार का भय न रहे, इसके लिए सरकार को गंभीरता से पहल करनी होगी।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों के हित केवल अधिमान्यता तक सीमित नहीं होने चाहिए। पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा, आवास, यात्रा सुविधा, आर्थिक संरक्षण तथा सामाजिक सम्मान से संबंधित योजनाओं को भी प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

अधिमान्यता के लिए 20 वर्ष की जगह 10 वर्ष अनुभव की मांग

अधिवेशन में मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में पत्रकारों की अधिमान्यता व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। परिषद ने मांग की कि ग्रामीण एवं देहात क्षेत्रों में लंबे समय से कार्य कर रहे पत्रकारों को तहसील स्तर पर स्थानीय अधिमान्यता प्रदान की जाए।

इसके साथ ही अधिमान्यता के लिए निर्धारित 20 वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता को घटाकर 10 वर्ष किए जाने की मांग की गई। परिषद का कहना है कि लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे अनेक योग्य पत्रकार वर्तमान व्यवस्था के कारण अधिमान्यता के लाभ से वंचित हैं। इसलिए अनुभव की अवधि को व्यावहारिक बनाया जाना आवश्यक है।

ज्ञापन में अधिमान्यता एवं श्रद्धा निधि से संबंधित लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा श्रद्धा निधि के लिए निर्धारित आयु सीमा को 62 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

पत्रकार स्वास्थ्य बीमा की राशि 10 लाख करने की मांग

पत्रकारों के स्वास्थ्य को लेकर भी परिषद ने शासन के समक्ष महत्वपूर्ण मांग रखी। ज्ञापन में पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना की वर्तमान राशि 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की गई।

इसके साथ ही पत्रकारों के हिस्से की प्रीमियम राशि कम करने तथा पत्रकारों के आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाने की मांग की गई। परिषद का कहना है कि पत्रकार और उनके परिवार भी गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में बेहतर चिकित्सा सुविधा के हकदार हैं। वर्तमान समय में महंगी होती चिकित्सा व्यवस्था को देखते हुए स्वास्थ्य बीमा की राशि में पर्याप्त वृद्धि आवश्यक है।

पत्रकारों को आवास और प्रेस क्लब के लिए भूमि देने की मांग

ज्ञापन में पत्रकारों के आवास की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया। परिषद ने मांग की कि जबलपुर, भोपाल सहित प्रत्येक जिला मुख्यालय में शासकीय योजनाओं के तहत निर्मित आवासों में पत्रकारों के लिए आरक्षित श्रेणी में आवास आवंटित किए जाएं।

इसके अलावा प्रत्येक जिला मुख्यालय पर पत्रकारों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं मनोरंजन गतिविधियों के लिए प्रेस क्लब की स्थापना हेतु भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।

पत्रकारों के लिए कार्यस्थल और संवाद का स्थायी मंच उपलब्ध कराने को पत्रकार हित में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

रेलवे और बस यात्रा में रियायत बहाल करने की मांग

परिषद ने पत्रकारों के लिए रेलवे एवं बस यात्रा में पूर्व में मिलने वाली रियायत सुविधा को पुनः बहाल किए जाने की मांग की। पत्रकारों को विभिन्न क्षेत्रों में समाचार संकलन, कवरेज और जनसमस्याओं की जानकारी जुटाने के लिए लगातार यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में यात्रा रियायत को पत्रकारों के कार्य की प्रकृति को देखते हुए महत्वपूर्ण सुविधा बताया गया।

साप्ताहिक एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं की विज्ञापन नीति में बदलाव की मांग

ज्ञापन में साप्ताहिक एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं की विज्ञापन नीति में सुधार करने की मांग भी रखी गई। परिषद ने कहा कि छोटे और स्थानीय स्तर पर प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र-पत्रिकाएं सीमित संसाधनों के बीच पत्रकारिता को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए विज्ञापन नीति में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।

कोविड में दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को सहायता की मांग

अधिवेशन में कोविड-19 महामारी के दौरान असामयिक रूप से दिवंगत हुए पत्रकारों के परिवारों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। परिषद ने मांग की कि कोविड काल में दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा परिवार के एक सदस्य को शासकीय सेवा में नियुक्ति देने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

पांच वर्षों से पत्रकार समितियों का गठन नहीं होने का मुद्दा

ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग की पत्रकार समितियों के नियमित गठन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। परिषद ने कहा कि निर्धारित नियमों के अनुसार पत्रकार समितियों का नियमित गठन किया जाना चाहिए, लेकिन पिछले करीब पांच वर्षों से समितियों का गठन नहीं हुआ है।

पत्रकारों की समस्याओं के निराकरण, शासन और पत्रकारों के बीच संवाद तथा पत्रकार हितों से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श के लिए इन समितियों का गठन आवश्यक बताया गया।

अधिवेशन में पत्रकार हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव

अधिवेशन में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाने के साथ-साथ ग्रामीण पत्रकारों को तहसील स्तर पर स्थानीय अधिमान्यता देने, अधिमान्यता की अनुभव सीमा घटाने, श्रद्धा निधि के लंबित मामलों का निराकरण करने, स्वास्थ्य बीमा की राशि बढ़ाने, प्रीमियम कम करने, आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता से उपलब्ध कराने, पत्रकारों को आवास सुविधा देने, जिला मुख्यालयों पर प्रेस क्लब के लिए भूमि उपलब्ध कराने तथा यात्रा रियायत बहाल करने जैसी मांगों पर व्यापक चर्चा हुई।

इसके अलावा कोविड में दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य को शासकीय नौकरी, साप्ताहिक एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं की विज्ञापन नीति में सुधार तथा जनसंपर्क विभाग की पत्रकार समितियों का नियमित गठन किए जाने की मांग भी शासन के समक्ष रखी गई।

राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में सफल हुआ आयोजन

पत्रकार अधिवेशन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के राष्ट्रीय संयोजक नलिनकांत बाजपेयी, संरक्षक गंगा पाठक, राष्ट्रीय अध्यक्ष परमानंद तिवारी, सचिव देवशंकर अवस्थी, प्रदेश अध्यक्ष राजेश दुबे, प्रांतीय उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला, महासचिव विलोक पाठक सहित मदन अवस्थी, अनुरोध पाटेरिया, रूपम बाजपेयी, शिवकुमार तिवारी, संतराम केवरे, शिव चौरसिया, सुजीत ठाकुर, उदय सिंह बैस, राहुल शर्मा, कोमल राकेश, संजीव गुप्ता एवं नवनीत दुबे सहित परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

अधिवेशन में पत्रकारों ने एकजुट होकर शासन से मांग की कि पत्रकारों से संबंधित लंबित मामलों का निराकरण केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहकर समयबद्ध और सकारात्मक तरीके से किया जाए।

अनूपपुर जिले से राजेश शुक्ला एवं चैतन्य मिश्रा की सक्रिय सहभागिता से जिले के पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को प्रदेश स्तरीय मंच पर प्रभावी ढंग से उठाया गया। विशेष रूप से ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा, अधिमान्यता, स्वास्थ्य, आवास एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों को मजबूती से सामने रखा गया।

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