अमरकंटक एक सप्ताह की रिमझिम बारिश से हुआ तरबतर,बादलों और कोहरे की आगोश में सिमटा जनजीवन

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अमरकंटक एक सप्ताह की रिमझिम बारिश से हुआ तरबतर,बादलों और कोहरे की आगोश में सिमटा जनजीवन

प्राकृतिक सौंदर्य चरम पर लेकिन यातायात,मजदूरी और दैनिक कामकाज पर पड़ा असर

संवाददाता / श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक / मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक जो प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल है जहां बीते एक सप्ताह से रिमझिम बारिश का सिलसिला लगातार जारी है । कभी हल्की फुहार , कभी मध्यम वर्षा तो कभी गरज-चमक के साथ तेज बारिश ने पूरे क्षेत्र को तरबतर कर दिया है । लगातार बरस रहे मेघों और घने कोहरे के कारण अमरकंटक इन दिनों किसी मनोहारी पर्यटन स्थल की तरह नजर आ रहा है । चारों ओर फैली हरियाली , बादलों से ढकी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं वर्षाकालीन सौंदर्य को नई ऊंचाईयाँ दे रही हैं ।

पिछले सात दिनों से आसमान पर काले बादलों का डेरा बना हुआ है । कभी बादल पहाड़ियों को अपनी आगोश में समेट लेते हैं तो कभी अचानक घना कोहरा पूरे क्षेत्र को ढक लेता है । बारिश और कोहरे के इस अद्भुत संगम ने अमरकंटक के प्राकृतिक वातावरण को और अधिक आकर्षक बना दिया है । नर्मदा उद्गम क्षेत्र सहित आसपास के वनांचल , घाटियां और धार्मिक स्थल बादलों की धुंध में लिपटे दिखाई दे रहे हैं , जिससे यहां का दृश्य किसी प्राकृतिक चित्र जैसा प्रतीत हो रहा है ।
हालांकि लगातार हो रही वर्षा का असर आम जनजीवन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है । सड़कों पर फिसलन बढ़ गई है तथा कई स्थानों पर पानी और कीचड़ जमा होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है । घने कोहरे के कारण सुबह और शाम के समय दृश्यता कम हो जाती है , जिससे वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है ।

खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन जारी है । मां नर्मदा के दर्शन और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए लोग लगातार अमरकंटक पहुंच रहे हैं ।
लगातार बारिश का सबसे अधिक प्रभाव दैनिक मजदूरी पर निर्भर मजदूर वर्ग पर पड़ा है । निर्माण कार्य , सड़क निर्माण , भवन निर्माण तथा खुले में होने वाले अनेक कार्य बाधित हो रहे हैं । रोज कमाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले मजदूरों को काम नहीं मिलने से आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है । वहीं स्थानीय स्तर पर संचालित छोटे व्यवसाय और रोजगार भी मौसम की मार झेल रहे हैं , जिससे कई परिवारों की आय प्रभावित हुई है ।
लगातार बादल छाए रहने से सूर्यदेव के दर्शन भी दुर्लभ हो गए हैं । लगभग एक सप्ताह से धूप नहीं निकलने के कारण वातावरण में नमी बढ़ गई है । घरों में कपड़े सूखने में परेशानी हो रही है और दिनभर ठंडक बनी रहने से लोगों ने हल्के गर्म कपड़ों का सहारा लेना शुरू कर दिया है । मौसम में आई इस ठंडक ने लोगों को वर्षाकाल का विशेष अहसास कराया है ।
गुरुवार 3 सितंबर 2026 को अमरकंटक का अधिकतम तापमान लगभग 22 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया । अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच मात्र तीन डिग्री का अंतर रहने से दिन और रात दोनों समय मौसम सुहावना और ठंडा बना रहा ।

बारिश के बीच अमरकंटक की वादियां , घने जंगल , पर्वत श्रृंखलाएं और धार्मिक स्थल कोहरे एवं बादलों की चादर में ढके हुए हैं । वर्षा की बूंदों से धुली हरियाली और ठंडी हवाएं जहां प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं , वहीं लगातार बारिश के कारण यातायात , रोजगार और दैनिक जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है । कुल मिलाकर अमरकंटक इन दिनों प्रकृति की अनुपम छटा और वर्षाजनित चुनौतियों—दोनों का एक साथ अनुभव कर रहा है ।

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