शोध में एआई का बढ़ता दखल: आईजीएनटीयू में 210 शोधार्थियों ने सीखे Elicit, Consensus और Research Rabbit के गुर

अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) में शोध कार्यों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. आंबेडकर चेयर एवं अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक शोध उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई।
कार्यशाला का विषय “शोधकर्ताओं के लिए एआई उपकरण: Elicit, Consensus, Research Rabbit, Cursor AI एवं शोध में अन्य उभरते एआई अनुप्रयोग” रहा। कार्यशाला का उद्देश्य शोधार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप तैयार करना और शोध प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित एवं तकनीक-सक्षम बनाने के लिए एआई उपकरणों की उपयोगिता से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम में कुल 210 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया।
तकनीक के साथ लगातार अपडेट रहना जरूरी
कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कंप्यूटर एवं प्रौद्योगिकी के विकास की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐसे में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए आवश्यक है कि वे समय के साथ स्वयं को लगातार अपडेट करते रहें। उन्होंने शोध कार्यों में आधुनिक तकनीकों के प्रभावी और सार्थक उपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शोध की गुणवत्ता और उसकी प्रक्रिया को बेहतर बनाने में आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। शोधार्थियों को इन तकनीकों को समझकर उनका जिम्मेदारीपूर्ण एवं प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
डॉ. आंबेडकर की जनजातीय विकास दृष्टि पर पुस्तकों का विमोचन
कार्यशाला के दौरान प्रभारी कुलपति एवं अतिथियों द्वारा “डॉ. आंबेडकर की जनजातीय विकास की दृष्टि” तथा “भारत में जनजातीय विकास के प्रति डॉ. आंबेडकर की धारणा” पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। पुस्तकों के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के जनजातीय विकास संबंधी विचारों एवं दृष्टिकोण को सामने लाने का प्रयास किया गया।
कार्यशाला की थीम एवं विषय-वस्तु पर डॉ. आंबेडकर चेयर के निदेशक प्रो. तनमय कुमार घोराई ने प्रस्तुति दी। अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रक्षा सिंह ने विशेष संबोधन देते हुए शोध में तकनीकी उपकरणों की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने एआई उपकरणों का कराया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोहित राजा तथा आईजीएनटीयू के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आनंद मेहर ने संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रशिक्षण दिया।
विशेषज्ञों ने शोधार्थियों को Elicit, Consensus, Research Rabbit और Cursor AI सहित अन्य उभरते एआई अनुप्रयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि इन उपकरणों का उपयोग शोध सामग्री खोजने, संबंधित साहित्य को व्यवस्थित करने, शोध विषयों को समझने, उपलब्ध अध्ययनों का विश्लेषण करने तथा शोध प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में किस प्रकार किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान एआई आधारित उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया, ताकि शोधार्थी केवल इनके सैद्धांतिक पक्ष को समझने के बजाय वास्तविक शोध कार्यों में भी इनका प्रभावी उपयोग कर सकें।
210 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्ण भागीदारी की। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कुल 210 प्रतिभागियों के पंजीकरण से कार्यशाला के प्रति शोधार्थियों की रुचि और आधुनिक एआई तकनीकों को सीखने की बढ़ती आवश्यकता का पता चला।
कार्यक्रम का प्रायोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. तनमय कुमार घोराई एवं प्रो. रक्षा सिंह ने किया, जबकि डॉ. विमल राज ए. एवं डॉ. बिमलेश सिंह सह-संयोजक रहे।
कार्यशाला के माध्यम से शोधार्थियों को आधुनिक एआई उपकरणों की संभावनाओं से परिचित कराने के साथ-साथ शोध प्रक्रिया में तकनीक के जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। आयोजन को विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने और शोधार्थियों को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।












































