वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी साहित्यकार बलदाऊ राम साहू ने डॉ. विनोद पांडेय को किया सम्मानित
मनेन्द्रगढ़/दुर्ग। छत्तीसगढ़ी भाषा एवं बाल साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार, पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सचिव एवं पिछड़ा वर्ग प्रसार आयोग के सदस्य बलदाऊ राम साहू ने दुर्ग प्रवास के दौरान शिक्षाविद और साहित्यकार डॉ. विनोद पांडेय को आमंत्रित कर उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर श्री साहू ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित कक्षा आठवीं की सहायक वाचन पुस्तक में शामिल गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क की कहानी का उल्लेख करते हुए डॉ. पांडेय की लेखनी की प्रशंसा की
श्री साहू ने कहा कि डॉ. पांडेय ने शिक्षा, साहित्य, पर्यटन, पुरातत्व और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को अपनी रचनात्मकता एवं शोधपरक दृष्टिकोण से समाज के सामने लाने का कार्य किया है। उन्होंने डॉ. पांडेय को भविष्य में भी इसी प्रकार साहित्य सृजन करते रहने की सलाह दी और उनके लेखन की सराहना की
इस दौरान बलदाऊ राम साहू ने अपने द्वारा रचित एवं हाल ही में प्रकाशित छत्तीसगढ़ी बाल साहित्य की चार पुस्तकों ‘पहाती के सुकवा’, ‘मोटरा संग मया नंदागे’, ‘गर मछरी के होतिस पाँख’ तथा ‘बिन बरसे झन जाबे बादल’ के साथ एक पेन भेंट कर डॉ. पांडेय का सम्मान किया। पुस्तकों का यह उपहार साहित्यिक संवाद और छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के प्रति दोनों साहित्यकारों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है
उल्लेखनीय है कि डॉ. विनोद पांडेय को उनकी शैक्षणिक, सामाजिक और साहित्यिक सेवाओं के लिये विभिन्न स्तरों पर सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार, मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण ‘शिक्षा श्री’, राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान ‘अक्षय प्रबोधक’, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू द्वारा 15 अगस्त के अवसर पर सम्मान, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर से सम्मान, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा सम्मान तथा कलेक्टर सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. पांडेय अनेक शोध संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं और शिक्षा के साथ साथ पर्यटन, पुरातत्व एवं पर्यावरण के क्षेत्र में विशेष कार्य कर रहे हैं। उनके कार्यों में स्थानीय इतिहास, प्राकृतिक विरासत और क्षेत्रीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास प्रमुखता से दिखाई देता है
वरिष्ठ साहित्यकार बलदाऊ राम साहू द्वारा डॉ. पांडेय का सम्मान किये जाने से साहित्य और शिक्षा जगत में प्रसन्नता का माहौल है। इस मुलाकात को छत्तीसगढ़ी भाषा, बाल साहित्य और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साहित्यिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है।




































