एनसीएल का ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ अभियान बना जीवन रक्षा की नई पहल

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एनसीएल का ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ अभियान बना जीवन रक्षा की नई पहल

724 विद्यार्थियों को मिला प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण, अब आपातकालीन स्थिति से निपटने में होंगे सक्षम

सिंगरौली। भारत सरकार की मिनीरत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा सामाजिक दायित्व के तहत संचालित ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ अभियान के अंतर्गत गुरुवार को एनसीएल मुख्यालय में प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को जीवन रक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए तैयार करना है।

एनसीएल ने गृहिणियों के सफल प्रशिक्षण अभियान के बाद अब अपने पोषित विद्यालयों के विद्यार्थियों को इस पहल से जोड़ते हुए प्राथमिक उपचार के प्रति जागरूक बनाने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत बच्चों को दुर्घटना, बीमारी या अन्य आपात स्थितियों में घबराने के बजाय सही तरीके से प्राथमिक उपचार देने की जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय चिकित्सालय, सिंगरौली की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने प्रतिभागियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन), सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता, सांप काटने पर प्राथमिक उपचार, जलने एवं गंभीर चोट लगने की स्थिति में अपनाए जाने वाले शुरुआती उपाय, रक्तचाप की जांच तथा सामान्य बीमारियों की पहचान और बचाव के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन रक्षक तकनीकों का अभ्यास भी कराया।

इस प्रशिक्षण में केंद्रीय विद्यालय, सिंगरौली के 40 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर प्राथमिक उपचार संबंधी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।

एनसीएल प्रबंधन के अनुसार ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ के प्रथम चरण में एनसीएल के 10 विद्यालयों के 3,200 विद्यार्थियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान के तहत अब तक 28 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 724 विद्यार्थियों को जीवन रक्षक कौशल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

एनसीएल का मानना है कि प्राथमिक उपचार का ज्ञान न केवल दुर्घटनाओं के दौरान अमूल्य साबित होता है, बल्कि यह बच्चों में आत्मविश्वास, सामाजिक जिम्मेदारी और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करता है। कंपनी की यह पहल स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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