कोतमा में शराब बिक्री पर सवाल: एमआरपी से अधिक दाम, गली-मोहल्लों तक सप्लाई के आरोप, कार्रवाई नहीं होने से उठे गंभीर प्रश्न
एनएच-43, बस स्टैंड और राजनगर तिराहा स्थित लाइसेंसी दुकानों से अवैध तरीके से गांवों तक शराब पहुंचाने के आरोप; आबकारी और पुलिस पर लापरवाही के आरोप, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
कोतमा। कोतमा क्षेत्र में संचालित लाइसेंसी शराब दुकानों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनएच-43, बस स्टैंड कोतमा तथा राजनगर तिराहा स्थित शराब दुकानों पर कई दिनों से शराब निर्धारित प्रिंट रेट (एमआरपी) से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। लोगों का कहना है कि अतिरिक्त राशि वसूले जाने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं
स्थानीय नागरिकों के अनुसार सुबह से ही शराब दुकान से जुड़े लोग वाहनों के माध्यम से शराब लेकर विभिन्न गांवों और मोहल्लों में पहुंचते हैं तथा खुलेआम बिक्री करते हैं आरोप है कि यह बिक्री स्कूलों, मंदिरों और रिहायशी इलाकों के आसपास भी की जा रही है, जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो रहा है
इस कार्य को अंजाम देने में ठेकेदार वीरेंद्र राय राहुल राय प्रदीप राय आबकारी विभाग के कृष्णकांत ऊईके महबूब खान सिपाही व अन्य लोगों की भूमिका काफी संदिग्ध है जिसके खिलाफ लोगों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है खासकर आभकारी मंत्री से ईश्वर ध्यान देने की बात कही गई है
लोगों का दावा है कि निगवानी, चाका, खामरोद, बेलिया फाटक, गोविंदा, सिमरिया चौराहा सहित आसपास के सैकड़ों गांवों में नियमित रूप से शराब पहुंचाई जाती है इन क्षेत्रों में कथित रूप से घर-घर और गली-मोहल्लों तक शराब की आपूर्ति होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेचने के कई वीडियो समय-समय पर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। इसके बावजूद न तो आबकारी विभाग द्वारा कोई सख्त कार्रवाई की गई और न ही पुलिस ने कोई प्रभावी कदम उठाया इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी कई बार शराब ठेके से जुड़े लोगों के साथ-साथ संबंधित आबकारी अधिकारियों तक भी पहुंचाई गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी रहने से आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ आबकारी अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने के आरोपों की जांच करने, अवैध रूप से गांवों तक शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है















