अमरकंटक के शांतिकुटी आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन

---Advertisement---

 

राजस्थानी श्रद्धालुओं में उमड़ा आस्था का सैलाब

 

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

 

अमरकंटक – मां नर्मदा की पावन उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित शांतिकुटी आश्रम इन दिनों भक्तिमय वातावरण से सराबोर है । अधिमास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ कथा श्रवण कर रहे हैं । शान्तिकुटी आश्रम परिसर में प्रतिदिन भजन , संकीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है ।

 

कथा व्यास राजस्थान के कोटड़ी निवासी परम पूज्य श्री अशोक भाई जी महाराज (नंदनवन वाले) अपने मुखारविंद से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान करा रहे हैं । वे भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं , भक्ति , धर्म तथा मानव जीवन के आदर्श मूल्यों का सरल एवं प्रेरणादायी वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्ममय जीवन की प्रेरणा दे रहे हैं ।

श्रद्धालुओं ने बताया कि पूज्य अशोक भाई जी पिछले लगभग पांच वर्षों से केवल सावे का प्रसाद ग्रहण कर अत्यंत सात्विक एवं तपस्वी जीवन व्यतीत कर रहे हैं तथा प्रतिदिन कथा के उपरांत मौन व्रत का पालन करते हैं । उनके तप , त्याग और साधना से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में शामिल हो रहे हैं ।

 

कथा श्रवण के लिए जयपुर , भीलवाड़ा , चित्तौड़गढ़ , कोटा , मांडलगढ़ , कोटड़ी , बांदनवाड़ा , अजमेर , गंगापुर , शंकरगढ़ , उदयपुर , सांगानेर आदि सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से 125 से अधिक श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे हुए हैं । शांतिकुटी आश्रम परिसर श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूर्णतः भक्तिमय हो उठा है ।

 

आयोजन से जुड़े नंदकिशोर प्रजापत ने बताया कि कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागृति , नैतिक मूल्यों का संवर्धन तथा लोगों को धर्म और सदाचार के मार्ग पर प्रेरित करना है । श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुचारु रूप से की गई हैं ।

 

शांतिकुटी आश्रम के श्रीमहंत स्वामी रामभूषण दास जी महाराज ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन अमरकंटक की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक प्रतिष्ठित करते हैं । कथा के माध्यम से क्षेत्र में धर्म , भक्ति और संस्कारों का वातावरण निर्मित हो रहा है जो समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है ।

 

उल्लेखनीय है कि कथा का शुभारंभ 11 जून को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ । श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा तट पर पूजन-अर्चन कर ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ नगर भ्रमण करते हुए शांतिकुटी आश्रम पहुंचकर कलश स्थापना की जिसके पश्चात संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा आरंभ हुई ।

यह धार्मिक आयोजन 11 जून से 18 जून 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक आयोजित किया जा रहा है । कथा का आयोजन नंदनवन अगरपुरा के तत्वावधान में किया जा रहा है । कथा व्यवस्था में बद्रीचंद दरगड़, ओमप्रकाश कबड़ा, कैलाश लढ़ा एवं कैलाश तोषनीवाल सहित अनेक श्रद्धालु सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे हैं ।

अधिमास के पुण्य अवसर पर आयोजित इस भागवत कथा ने अमरकंटक की पावन धरा को भक्ति , श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया है । श्रद्धालुओं से कथा में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की गई है ।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment