जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम पंचायत प्यारी क्र. 1 पंचायत में ‘निरंकुश एकाधिकार’; सीएम हेल्पलाइन की आड़ में भ्रष्टाचार को दिया जा रहा ‘वैधानिक संरक्षण’

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शिकायत क्र. 37380134 में लीपापोती: पीसीओ यूजीन टोप्पो ने ‘कपोल-कल्पित’ नियमों का दिया हवाला; अनिवार्य मासिक बैठक को बताया ‘मांग-आधारित’, विधिक अज्ञानता ने खोली सुशासन की पोल

 

 

जमुनाकोतमा अनूपपुर। मध्य प्रदेश शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और पारदर्शी सुशासन के दावों का अनूपपुर जिले में सरेआम मखौल उड़ाया जा रहा है। ग्राम पंचायत प्यारी क्रमांक 1 में पंचायती राज की मूल भावना को कुचलते हुए सरपंच और सचिव ने जिस प्रकार अपना ‘निरंकुश एकाधिकार’ (Autocratic Monopoly) स्थापित कर लिया है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर कुठाराघात है। इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जब इस प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता की शिकायत शासन की सर्वोच्च प्रणाली ‘सीएम हेल्पलाइन’ (शिकायत क्र. 37380134) में की जाती है, तो जांच अधिकारी विधिक प्रावधानों की सरेआम अवहेलना करते हुए भ्रष्टाचारियों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ बन जाते हैं।

क्षेत्रीय पीसीओ (PCO) श्री यूजीन टोप्पो द्वारा प्रस्तुत किया गया जांच प्रतिवेदन उनके प्रशासनिक दिवालियापन और घोर विधिक अज्ञानता का जीवंत प्रमाण है।

 

विधिक प्रावधानों की सरेआम हत्या :

 

पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्माण एवं सामान्य प्रशासन जैसी स्थायी समितियों का गठन किया जाता है। ‘मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत (स्थायी समिति के सदस्यों की पदावधि और कामकाज के संचालन की प्रक्रिया) नियम, 1994’ के नियम 7 में अत्यंत स्पष्ट ‘आज्ञापक प्रावधान’ (Mandatory Provision) है कि प्रत्येक स्थायी समिति अपनी बैठक माह में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित करेगी। इस वैधानिक बाध्यता का मूल उद्देश्य पंचायत के वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों में निर्वाचित पंचों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। परंतु प्यारी क्रमांक 1 में इन समितियों को कागजों तक सीमित कर पूरी पंचायत को सरपंच और सचिव की ‘ निजी जागीर’ बना दिया गया है।

 

पीसीओ की ‘तथ्यहीन एवं कूटरचित’ आख्या:

 

शिकायत क्र. 37380134 के निराकरण हेतु पीसीओ श्री यूजीन टोप्पो ने जो तर्क प्रस्तुत किए हैं, वे शासन की आंखों में धूल झोंकने के समान हैं:

विधिक भ्रांति (Legal Fallacy): शिकायत ‘स्थायी समितियों’ (निर्वाचित पंचों की संस्था) की निष्क्रियता के विरुद्ध दर्ज कराई गई थी। इसके उलट, पीसीओ ने अपने प्रतिवेदन में गणतंत्र दिवस व महिला दिवस पर आहूत होने वाली ‘ग्राम सभा’ (आम जनमानस की संस्था) का महिमामंडन कर दिया। एक उत्तरदायी अधिकारी द्वारा इन दो पृथक वैधानिक इकाइयों के मध्य अंतर न कर पाना उनकी लचर प्रशासनिक कार्यक्षमता को उजागर करता है।

 

स्व-निर्मित नियमों का अविष्कार :

 

 

पीसीओ ने अपनी आख्या में यह हास्यास्पद तर्क दिया है कि “तीनों समितियों की बैठक अध्यक्ष अथवा सदस्यों द्वारा प्रस्तुत पत्र के आधार पर आयोजित होती है।” यह कथन पूर्णतः विधिक रूप से आधारहीन है। मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत (स्थायी समिति के सदस्यों की पदावधि और कार्य संचालन की प्रक्रिया) नियम, 1994 के नियम 7 में ‘अनिवार्य मासिक बैठक’ का स्पष्ट उल्लेख है, न कि किसी ‘मांग-आधारित’ (Demand-based) बैठक का। मनगढ़ंत नियमों का हवाला देकर सरपंच-सचिव को ‘क्लीन चिट’ देना, संस्थागत भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने का अक्षम्य कृत्य है।

 

लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन:

 

 

स्थायी समितियों की बैठकें आहूत न करना केवल एक प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं, बल्कि यह पंचायत के निर्वाचित पंचों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। अधिकारियों की इसी पक्षपातपूर्ण और संदेहास्पद कार्यशैली के कारण प्यारी क्रमांक 1 में विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं को बल मिल रहा है।

 

उच्चाधिकारियों से कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग:

 

 

ग्राम पंचायत प्यारी क्रमांक 1 के त्रस्त एवं जागरूक नागरिकों ने अब सीधे जिलाधीश (Collector) महोदय एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत) से निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्यवाही की मांग की है:

 

भ्रामक आख्या पर निलंबन:

 

सीएम हेल्पलाइन में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने और शासन को गुमराह करने वाले पीसीओ यूजीन टोप्पो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित की जाए।

 

धारा 40 के तहत सरपंच पर प्रहार:

 

मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत (स्थायी समिति के सदस्यों की पदावधि और कार्य संचालन की प्रक्रिया) नियम, 1994 के नियम 7 का खुला उल्लंघन कर पदीय दायित्वों की घोर उपेक्षा करने वाले सरपंच के विरुद्ध पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 के तहत ‘पद-पृथक्करण’ (Removal from Post) की दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित हो।

 

सचिव पर अनुशासनात्मक गाज

 

 

: बैठकों के आयोजन एवं पंजिका संधारण में घोर लापरवाही बरतने वाले पंचायत सचिव पर सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कठोर कार्यवाही की जाए।

अब यह देखना शेष है कि अनूपपुर जिला प्रशासन इस ‘प्रशासनिक अराजकता’ पर विधिक हथौड़ा चलाता है, या फिर भ्रष्ट तंत्र को इसी प्रकार फलने-फूलने की मौन स्वीकृति प्रदान करता है।

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