जमीन दिलाने के नाम पर बैगा आदिवासियों से वसूली का आरोप केलमनिया बीट गार्ड पर 10 से 15 हजार रुपये लेने का आरोप, ग्रामीणों में डर का माहौल

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जमीन दिलाने के नाम पर बैगा आदिवासियों से वसूली का आरोप
केलमनिया बीट गार्ड पर 10 से 15 हजार रुपये लेने का आरोप, ग्रामीणों में डर का माहौल

अनूपपुर। जिले के पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत के अंतिम छोर पर स्थित अहिगरवा पंचायत के पीपरहा एवं खासरमटी गांव में बैगा जनजाति के लोगों से जंगल की जमीन दिलाने के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि केलमनिया बीट की बीट गार्ड सरस्वती बैगा द्वारा चौकीदारों और कुछ निजी लोगों के माध्यम से प्रति व्यक्ति 10 हजार से 15 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीपरहा गांव के कई बैगा आदिवासियों ने बताया कि उनसे जमीन दिलाने का आश्वासन देकर पैसे लिए गए। किसी ने 10 हजार रुपये देने की बात कही, तो किसी ने 15 हजार रुपये तक देने की जानकारी दी। वहीं कुछ ग्रामीणों ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी बकरी बेचकर भी पैसे देने पड़े।

ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से जंगल की जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और उसी भूमि पर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। अब उन्हें जमीन का पट्टा दिलाने का भरोसा देकर पैसों की मांग की जा रही है, लेकिन कितनी जमीन मिलेगी इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।

कैमरे के सामने अधिकांश बैगा आदिवासी खुलकर बोलने से कतराते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि वसूली के लिए कुछ चौकीदारों और निजी लोगों को लगाया गया है, जिससे गांव में डर का माहौल बना हुआ है। हालांकि अनौपचारिक बातचीत में कई लोगों ने पैसे लेने की बात स्वीकार की। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले भी कुछ बीट गार्डों द्वारा पैसे लिए जाने की बात सामने आती रही है।

मामले की पड़ताल के दौरान अनूपपुर वन मंडल में जानकारी लेने पर बताया गया कि केलमनिया बीट शहडोल साउथ रेंज के अंतर्गत आता है, इसलिए इस संबंध में शहडोल रेंज से संपर्क करने की बात कही गई। वहीं जांच में बीट गार्ड के रूप में सरस्वती बैगा का नाम सामने आया है।

गौरतलब है कि बैगा जनजाति को विशेष रूप से संरक्षित और राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की श्रेणी में रखा जाता है। इसके बावजूद यदि जमीन के पट्टे के नाम पर उनसे वसूली की जा रही है तो यह गंभीर मामला माना जा रहा है। बैगा समुदाय पहले से ही पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, ऐसे में इस तरह के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या कहती हैं वन मंडल अधिकारी
शहडोल वन मंडल अधिकारी श्रद्धा पंडरे ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जमीन के बदले पैसे लेने का मामला सामने आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि शिकायत और आरोपों के बाद वन विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच कर कार्रवाई करता है या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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