श्रम संहिताओं के विरोध में 1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ मनाएंगे मजदूर संगठन
विजय विश्वकर्मा ने कहा— श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास
बिलासपुर। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र फेडरेशनों के आह्वान पर 1 अप्रैल 2026 को देशभर में ‘काला दिवस’ मनाया जाएगा। यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय नियमों की अधिसूचना की निर्धारित तिथि के विरोध में लिया गया है। संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) के पदाधिकारी विजय विश्वकर्मा ने कहा कि प्रस्तावित श्रम संहिताएं श्रमिक हितों के विरुद्ध और नियोक्ता समर्थक हैं, जिनसे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे।
उन्होंने बताया कि इन श्रम संहिताओं के लागू होने से यूनियन बनाने, हड़ताल करने, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल जैसे महत्वपूर्ण अधिकार प्रभावित होंगे। विजय विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि यह कदम श्रमिकों को पुनः शोषणकारी परिस्थितियों की ओर धकेलने जैसा है, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय के विरोध में एसईसीएल के सभी क्षेत्रों और इकाइयों में कर्मचारी 1 अप्रैल को काले बैज और काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही विरोध प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी, जुलूस और अन्य रचनात्मक तरीकों से श्रमिक अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
विजय विश्वकर्मा ने बताया कि ट्रेड यूनियनों ने सभी राज्य इकाइयों, मजदूर संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों से इस आंदोलन को समर्थन देने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि मजदूर हितों की रक्षा के लिए यह आंदोलन आवश्यक है और यदि श्रमिक विरोध को अनदेखा किया गया तो आगे और भी व्यापक आंदोलन किया जाएगा।










