आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय स्मृति व्याख्यान का आयोजन, रसायन विज्ञान के उन्नत शोध पर हुआ मंथन
अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के रसायन विभाग में महान वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की स्मृति में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता के रसायन विभाग (अकार्बनिक अनुभाग) के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर समरेश भट्टाचार्य ने “रूथेनियम द्वारा सिग्मा बंधों का सक्रियण: संश्लेषण और उत्प्रेरण में अनुप्रयोग” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
व्याख्यान के दौरान प्रोफेसर भट्टाचार्य ने समन्वय यौगिकों, रूथेनियम कॉम्प्लेक्स तथा उत्प्रेरण के क्षेत्र में अपने शोध कार्य और उसके वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक रसायन विज्ञान में रूथेनियम आधारित यौगिकों का उपयोग कई जटिल रासायनिक अभिक्रियाओं को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही उन्होंने भारत में रसायन विज्ञान अनुसंधान के विकास में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें भारतीय वैज्ञानिक परंपरा का प्रेरणास्रोत बताया।
गौरतलब है कि प्रोफेसर समरेश भट्टाचार्य को उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान के लिए वर्ष 2005 में देश के प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनका यह व्याख्यान विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ।
कार्यक्रम के संरक्षक एवं प्रभारी कुलपति प्रोफेसर ब्योमकेश त्रिपाठी ने स्मृति व्याख्यान की सफलता के लिए अपना पूर्ण समर्थन और प्रोत्साहन प्रदान किया। विज्ञान संकाय के पूर्व डीन और कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर तन्मय कुमार घोरई ने अपने संबोधन में इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों को ज्ञान-विस्तार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। वहीं विज्ञान संकाय की डीन प्रोफेसर पूनम शर्मा ने संकाय की उपलब्धियों और शोध गतिविधियों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के संयोजक एवं रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुब्रत जाना ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया। इस अवसर पर डॉ. बिस्वजीत मांझी ने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया
व्याख्यान में रसायन विभाग के अन्य संकाय सदस्य डॉ. साधुचरण मल्लिक, डॉ. अजय शंकर, डॉ. अवनीश शुक्ला, डॉ. सदानंदम गुल्लापेल्ली तथा डॉ. कुंजबिहारी मिश्रा सहित बड़ी संख्या में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से संवाद कर शोध से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की
यह आयोजन विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक चिंतन और शोध संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ









