अमरकंटक के हरे-भरे जंगलों में आग की साजिश , पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा – वनभूमि आग की चपेट में , जिम्मेदारी तय करने की मांग

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संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

 

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक जो कि एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में देशभर में प्रसिद्ध है , इन दिनों जंगलों में लग रही आग की घटनाओं से चिंतित दिखाई दे रही है । पतझड़ और गर्मी के मौसम की आहट के साथ ही अमरकंटक के हरे-भरे वन क्षेत्रों में अज्ञात तत्वों द्वारा आग लगाए जाने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं । इससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता , पर्यावरण और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अमरकंटक नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 8 स्थित कपिला संगम–जमुना दादर क्षेत्र के जंगलों में मंगलवार प्रातः अज्ञात लोगों द्वारा आग लगा दी गई । देखते ही देखते आग जंगलों में फैल गई और लगभग 8 से 10 एकड़ वनभूमि इसकी चपेट में आ गई । इस दौरान क्षेत्र में उगे नवोदित पौधे , सूखी झाड़ियां तथा कई वृक्षों के हिस्से जलकर नष्ट हो गए ।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार इससे पूर्व भी दो-तीन दिन पहले इसी क्षेत्र में जंगल में आग लगने की घटना सामने आई थी जिसे बड़ी मुश्किल से बुझाया जा सका था । बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं से अमरकंटक की हरी-भरी वादियां प्रभावित हो रही हैं और नगर के पर्यावरण पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है । जंगलों में लगने वाली आग से वातावरण में धुआं फैल रहा है जिससे प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र के तापमान में भी वृद्धि देखी जा रही है ।

बताया जा रहा है कि जिस क्षेत्र में आग लगी वह भूभाग वन विभाग और नगर परिषद की सीमा से जुड़ा हुआ है । ऐसे में आग बुझाने और उसकी रोकथाम को लेकर दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता नजर नहीं आती । स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई की जाती तो आग को फैलने से रोका जा सकता था ।

क्षेत्रीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अमरकंटक के जंगलों में जानबूझकर आग लगाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए । साथ ही वन विभाग एवं नगर परिषद की जिम्मेदारी तय करते हुए ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए ताकि पवित्र नगरी अमरकंटक की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य सुरक्षित रह सके ।

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