- अमरकंटक ताप विद्युत गृह में वाहन उपयोग से लेकर ठेका भुगतान तक सवाल, निगरानी तंत्र की जवाबदेही पर उठी उंगली
अनूपपुर।राजीव कुमार
*“परहित सरिस धरम नहि भाई। पर पीड़ा सम नहि अधमाई॥”* रामचरितमानस की यह चौपाई परहित और दूसरों को पीड़ा न देने का संदेश देती है, लेकिन अमरकंटक ताप विद्युत गृह में सरकारी वाहनों के कथित निजी उपयोग और ठेका श्रमिकों की मजदूरी में कथित कटौती के आरोप व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सरकारी वाहन या निजी सुविधा का साधन?
अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई में अधिकारियों के आवागमन के लिए अनुबंध पर लगाए गए चार पहिया वाहनों के निजी उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि विभागीय कार्यों के लिए लगाए गए वाहनों का इस्तेमाल निजी यात्राओं, बाजार, मॉल, थिएटर और पार्क जाने में भी किया जा रहा है। हाल ही में सिविल विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में लगे एक वाहन की तस्वीर सामने आने का दावा किया गया है, जिसे रविवार को उमरिया जिले में देखा गया।
इस संबंध में अधीक्षण अभियंता से फोन पर संपर्क करने पर कथित तौर पर निजी बुकिंग का उल्लेख किया गया। ऐसे में सवाल है कि क्या यात्रा की राशि व्यक्तिगत रूप से जमा हुई और क्या लॉगबुक तथा अनुबंध इसकी पुष्टि करते हैं? सरकारी वाहन जनता के धन से चलते हैं; इसलिए उनके उपयोग और भुगतान का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
मजदूरी में कथित कटौती, संदिग्ध नाम और पीएफ पर सवाल
ताप विद्युत गृह में ठेका श्रमिकों के भुगतान को लेकर भी गंभीर आरोप हैं। दावा है कि कुछ मजदूरों को भुगतान के बाद 290, 300 या 320 रुपये तक वापस करने के लिए दबाव बनाया जाता है। आरोप यह भी हैं कि वेतन पत्रकों में ऐसे लोगों के नाम दर्ज किए जा रहे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर संयंत्र में काम नहीं किया, जबकि उनके नाम पर गेट पास और भविष्य निधि (पीएफ) जमा होने की प्रविष्टियां की जा रही हैं।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला श्रमिकों के अधिकारों और भुगतान व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल है कि श्रमिकों की उपस्थिति, वेतन पंजी, बैंक भुगतान और पीएफ रिकॉर्ड का मिलान कौन करता है? श्रम विभाग और संयंत्र का सतर्कता विभाग क्या कार्रवाई कर रहा है?
सरकारी वाहन के उपयोग से लेकर मजदूर की मजदूरी तक—हर रुपये का हिसाब जरूरी है।* संबंधित प्रबंधन, ठेकेदारों और अधिकारियों का पक्ष लेकर वाहन अनुबंध, लॉगबुक, वेतन अभिलेख और पीएफ रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आए और दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय हो सके।







































































