रांची 28 अक्टूबर। सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री चौधरी शिवराज सिंह ने आज दिनांक 28 अक्टूबर को झारखंड के जामताड़ा जिले में स्थित ईसीएल के अधीन कास्ता कोल ब्लाक में भूमिगत कोयला गैसीकरण आरएंडडी पायलट प्लांट का दौरा किया।
इस दौरे के दौरान कनाडा की ‘एर्गो एक्सर्जी टेक्नोलाजीज इंक’ (ईईटीआई) के निदेशक डा0 माइकल ब्लाइंडर्मन ने अपनी टीम के साथ मिलकर पायलट प्लांट में चल रही पूर्व-प्रज्वलन (प्री-इग्निशन) गतिविधियों के बारे में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री चौधरी शिवराज सिंह को जानकारी दी। मौके पर सीएमपीडीआई के क्षेत्रीय संस्थान-1-आसनसोल के क्षेत्रीय निदेशक श्री अभिजीत बनर्जी, मुख्यालय-रांची के महाप्रबंधक (सीईडी) श्री बी0के0 पांडे तथा आरआई-1 तथा क्लीन एनर्जी डिपार्टमेंट के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
कोयला गैसीकरण आरएंडडी परियोजना का उद्देश्य भारतीय भू-खनन (जियो-माइनिंग) परिस्थितियों के तहत भूमिगत कोयला गैसीकरण तकनीक को स्थापित करना और उसका प्रदर्शन करना है। इस परियोजना के लिए सीएमपीडीआई, रांची और ईसीएल, संकटोरिया मुख्य कार्यान्वयन एजेंसी है, जबकि कनाडा की ईईटीआई उप-कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है। इस परियोजना को कोल इंडिया के आरएंडटी बोर्ड द्वारा वित्तपोषित किया गया है।

भूमिगत कोयला गैसीकरण एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जो कोयले को पारंपरिक तरीके से बाहर निकाले बिना, उसे उसी स्थान पर सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में परिवर्तित करती है। इससे उत्पादित गैस का उपयोग ईंधन के रूप में या रसायनों सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, उर्वरकों और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण के लिए कच्चे माल (फीडस्टाक) के तौर पर किया जा सकता है। यह तकनीक उन कोयला संसाधनों का उपयोग करने की संभावना भी प्रदान करती है, जिन्हें पारंपरिक खनन विधियों से आर्थिक रूप से निकालना संभव नहीं होता।
इस परियोजना की शुरूआत मार्च, 2024 में हुई थी और इसे दो चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई थी। चरण-1, जिसमें साइट की उपयुक्तता और तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन शामिल था, जिसे मई, 2025 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। अब चरण-2 के तहत यह परियोजना पायलट-स्केल गैसीकरण चरण की ओर बढ़ रही है] जिसके लिए पूर्व-प्रज्वलन (प्री-इग्निशन) गतिविधियां चल रही हैं।
यह पहल सीएमपीडीआई के उन अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिनका उद्देश्य कोयले के उपयोग की उन्नत तकनीकों को खोजना और कोयला क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देना है। इससे ‘भूमिगत कोयला गैसीकरण’ के क्षेत्र में स्वदेशी विशेषज्ञता विकसित होने की उम्मीद है। साथ ही, यह भारत के कोयला संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए नए द्वार खोलेगा, जो ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है।







































































