रक्षाबंधन की तैयारियों से सजा कोतमा

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रक्षाबंधन की तैयारियों से सजा कोतमा

घरों में गूंज रही राखियां बनाने की खनक, बाजारों में खरीदारी की रौनक; मेहंदी और पारंपरिक परिधानों को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह

रिपोर्टर भरत मिश्रा, कोतमा

कोतमा। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही कोतमा नगर में त्योहार की रौनक दिखाई देने लगी है। महिलाएं और बच्चियां पर्व की तैयारियों में पूरे उत्साह के साथ जुटी हुई हैं। कहीं घरों में हाथों से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं, तो कहीं बाजारों में नए कपड़ों की खरीदारी और ब्यूटी पार्लरों में मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं एवं युवतियों की भीड़ नजर आ रही है।

रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में विशेष चहल-पहल बनी हुई है। बहनें भाई की कलाई पर बांधने के लिए खूबसूरत राखियों की खरीदारी के साथ-साथ अपने परिधानों और श्रृंगार की तैयारियों में लगी हैं। वहीं कई महिलाएं और बच्चियां बाजार से सामग्री खरीदकर घर पर ही पर्यावरण के अनुकूल और हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं।

रेशम के धागे, मोती और कुंदन से तैयार हो रहीं राखियां

इस बार घर पर राखी बनाने का चलन भी देखने को मिल रहा है। महिलाएं और बच्चियां रेशम के धागे, मोती, कुंदन, ऊन सहित अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल कर आकर्षक डिजाइन की राखियां बना रही हैं। हाथ से तैयार की गई इन राखियों को लेकर बच्चियों में विशेष उत्साह है।

नगर की अक्षिता ताम्रकार ने बताया कि वह इस रक्षाबंधन पर अपने भाई की कलाई पर अपने हाथों से बनाई राखी बांधेंगी। इसके लिए वह बाजार से मोती और ऊन लेकर आई हैं और घर पर ही राखी तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि खुद राखी बनाने से त्योहार से जुड़ाव और भी गहरा महसूस होता है।

नए परिधानों की खरीदारी में उमड़ी भीड़

रक्षाबंधन को लेकर नगर के बाजारों में महिलाओं और युवतियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। साड़ी, सूट, ड्रेस, अनारकली सूट, फ्लोरल प्रिंटेड पलाजो सेट और ट्रेंडी साड़ियों सहित पारंपरिक और इंडो-वेस्टर्न परिधानों की मांग बनी हुई है।

नगर की संगीता शर्मा ने बताया कि वह रक्षाबंधन के लिए पारंपरिक और इंडो-वेस्टर्न ड्रेस की खरीदारी कर रही हैं। इस बार गुलाबी, पीच, पेस्टल और लाइट ग्रीन जैसे आकर्षक रंगों के परिधानों को विशेष पसंद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वह करीब एक सप्ताह से त्योहार की तैयारियों में जुटी हैं और ऐसे कपड़े पसंद कर रही हैं जो देखने में फेस्टिव होने के साथ सावन की उमस और गर्मी में आरामदायक भी हों।

मेहंदी के बिना अधूरा लगता है रक्षाबंधन का श्रृंगार

रक्षाबंधन से पहले महिलाओं और युवतियों में मेहंदी लगवाने को लेकर भी खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। शहर के ब्यूटी पार्लरों में मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की भीड़ नजर आ रही है। कई युवतियां पारंपरिक डिजाइन के साथ अरेबिक बेल, मिनिमलिस्ट मंडला आर्ट, ब्रेसलेट स्टाइल और अन्य आधुनिक डिजाइन पसंद कर रही हैं।

अनामिका नामदेव ने बताया कि वह रक्षाबंधन पर हाथों में अरेबिक बेल, मिनिमलिस्ट मंडला आर्ट और ब्रेसलेट स्टाइल मेहंदी लगवाने की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि केमिकलयुक्त नकली मेहंदी से बचना चाहिए और संभव हो तो प्राकृतिक या त्वचा के अनुकूल मेहंदी का इस्तेमाल करना चाहिए।

सावन और रक्षाबंधन के रंग में सजे हाथ

सावन माह महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान तीज सहित कई पर्व आते हैं और महिलाएं सोलह श्रृंगार कर त्योहार की खुशियां मनाती हैं। रक्षाबंधन भी इसी श्रृंखला का महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे में महिलाएं अपने परिधानों, मेहंदी, आभूषण और मेकअप को लेकर विशेष तैयारियां कर रही हैं।

कल्पना नामदेव का कहना है कि त्योहार का वास्तविक आनंद आपसी मेल-मिलाप और भावनाओं में है। कपड़ों या परंपराओं को किसी एक दायरे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। हर महिला को अपनी पसंद और सहजता के अनुसार त्योहार मनाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वह नए कपड़ों की खरीदारी में जुटी हैं और रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी बांधने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

भगवान शिव-पार्वती और झूला मेहंदी बनी पसंद

रक्षाबंधन के साथ सावन की थीम को जोड़ते हुए इस बार झूला मेहंदी डिजाइन भी महिलाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नगर की ब्यूटी पार्लर संचालिका एवं ब्यूटीशियन रोशनी वर्मन ने बताया कि सावन और तीज की थीम को मेहंदी में शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि हथेली पर भगवान शिव और माता पार्वती की आकृति बनाई जा सकती है। उंगलियों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ अथवा धार्मिक प्रतीक बनाए जा सकते हैं। दोनों हाथों में झूले का डिजाइन बनाकर एक तरफ फूल-पत्तियों और दूसरी ओर पूजा की थाली अथवा महिला की आकृति बनाई जा सकती है। चाहें तो डिजाइन में ‘हैप्पी सावन’ भी शामिल किया जा सकता है।

मोर और झूले की डिजाइन से बढ़ेगी हाथों की रौनक

रोशनी वर्मन के अनुसार सावन में बारिश के कारण प्रकृति का सौंदर्य भी बढ़ जाता है और मोर का नृत्य इस मौसम की खूबसूरती से जुड़ा हुआ है। इसलिए एक हाथ में नाचते हुए मोर की डिजाइन और उसके आसपास पत्तियों का पैटर्न बनाया जा सकता है। दूसरे हाथ पर झूले पर बैठी महिला की आकृति के साथ पत्तियों का डिजाइन तैयार किया जा सकता है। कलाई पर मोर की आकृति इस डिजाइन को और आकर्षक बना सकती है।

जो महिलाएं हथेली को अधिक भरना नहीं चाहतीं, वे हाथ के पीछे झूला मेहंदी का मिनिमल डिजाइन बनवा सकती हैं। इसमें झूले पर बैठे बच्चे की आकृति के साथ फूल-पत्तियों की छोटी डिजाइन बनाई जा सकती है। छोटे हाथों पर गोल टिक्की और सरल झूला मेहंदी डिजाइन भी आकर्षक दिखाई दे सकती है।

मिनिमल डिजाइन भी युवतियों की पसंद

कम और सादगीपूर्ण मेहंदी पसंद करने वाली युवतियों के लिए पेड़ और झूले की मिनिमल डिजाइन भी आकर्षण का केंद्र है। इसमें पेड़ की शाखा पर झूला और उस पर बैठी लड़की की आकृति बनाई जा सकती है। नीचे घास और आसपास छोटी चिड़ियों तथा पत्तियों की डिजाइन हाथों को सुंदर लुक देती है।

रोशनी वर्मन के अनुसार चाहें तो मेहंदी डिजाइन में पति, भाई या परिवार के किसी खास व्यक्ति का नाम भी शामिल किया जा सकता है। इससे मेहंदी व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप से खास बन जाती है।

त्योहार को लेकर हर उम्र में उत्साह

रक्षाबंधन को लेकर जहां महिलाएं अपने श्रृंगार और परिधानों की तैयारी में जुटी हैं, वहीं छोटी बच्चियों में भाई को राखी बांधने और नए कपड़े पहनने को लेकर खास उत्सुकता है। घरों में राखी तैयार करने से लेकर मिठाइयों और पूजन की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

महिलाओं का कहना है कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने का पर्व नहीं, बल्कि परिवार को एक साथ जोड़ने और रिश्तों में प्रेम एवं अपनापन बढ़ाने का अवसर भी है। कोतमा नगर में त्योहार की तैयारियों के बीच बाजारों से लेकर घरों तक उत्साह और उमंग का माहौल दिखाई दे रहा है।

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