पशुपालन विभाग ने जारी की एडवायजरी

---Advertisement---

 

वर्षा ऋतु में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए समय पर कराएं टीकाकरण

 

अनूपपुर 02 जुलाई 2026/ मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने वर्षा ऋतु के दौरान पशुधन को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पशुपालकों एवं किसान भाइयों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवायजरी जारी की है। विभाग ने बताया है कि वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण पशुओं में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इस मौसम में विशेष रूप से गलघोटू (एचएस), लंगड़ा बुखार (बीक्यू), खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) एवं लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) जैसी गंभीर बीमारियां पशुधन को प्रभावित कर सकती हैं।

 

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता बरतें तथा किसी भी प्रकार के बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाएं। विभाग द्वारा जारी एडवायजरी में बताया गया है कि गलघोटू रोग में पशु को तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई तथा गले में सूजन की समस्या होती है। वहीं, लंगड़ा बुखार में पैरों में सूजन आने के कारण पशु को चलने-फिरने में गंभीर परेशानी होती है। खुरपका-मुंहपका रोग में पशुओं के मुंह एवं खुरों में छाले पड़ जाते हैं, जिससे पशु भोजन करने में असमर्थ हो जाता है। इसी प्रकार लंपी स्किन डिजीज के कारण पशु के शरीर पर गांठें बन जाती हैं तथा लंबे समय तक कमजोरी बनी रहती है।

विभाग ने बताया कि ये संक्रामक बीमारियां न केवल पशुओं के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी कमी लाती हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए इन बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण कराना अत्यंत आवश्यक है। विभाग ने सभी पशुपालकों से अपने पशुओं का नियमित एवं समयबद्ध टीकाकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को यह भी सलाह दी है कि वे वर्षा ऋतु के दौरान पशुशालाओं में साफ-सफाई बनाए रखें, जलभराव की स्थिति न बनने दें तथा पशुओं के लिए सूखे एवं स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था करें। यदि किसी पशु में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो उसे तत्काल अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें और निकटतम शासकीय पशु चिकित्सालय अथवा पशु चिकित्सक से संपर्क कर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ प्राप्त करें।

इसके अतिरिक्त पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि कोई मादा पशु गर्मी (हीट) में आए, तो उसका कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) ही कराएं। विभाग के अनुसार कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार के साथ-साथ पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि होती है तथा बेहतर गुणवत्ता वाले पशुधन के विकास में सहायता मिलती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

July 2, 2026

July 2, 2026

July 2, 2026

July 2, 2026

July 2, 2026

July 2, 2026

Leave a Comment