नौरोजाबाद थाना की कुर्सी पर टिकी भ्रष्ट निगाहें

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नौरोजाबाद थाना की कुर्सी पर टिकी भ्रष्ट निगाहें

उमरिया — कहते हैं जब ईमानदारी चमकती है तो भ्रष्टाचार की आँखें चौंधिया जाती हैं। कुछ ऐसा ही हो रहा है उमरिया पुलिस में, जहाँ थाना नौरोजाबाद की कुर्सी पर भ्रष्ट निगाहें टिक गई हैं और निशाने पर आ गए हैं जिले के सबसे बेदाग, ईमानदार और लोकप्रिय थाना प्रभारी उपनिरीक्षक बालेन्द्र शर्मा जिन्हें जन सेवा और कानून ही प्रिय है

पिछले ढाई साल से उमरिया जिले की सेवा कर रहे इस अधिकारी के खिलाफ आज तक एक भी शिकायत वरिष्ठ कार्यालय तक पहुंचने का मौका नहीं दिया, अपनी कर्तव्य परायणता और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में समुचित कार्यवाही से आम जनता का दिल जीता है।पिछले एक साल से नौरोजाबाद थाना का दायित्व सम्हाल रहे श्री शर्मा जी ने हर फरियादियों से मिलकर उनके दिल में उतर कर कठिन से कठिन समस्या का निदान करना उनके कार्य शैली का हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने जिले के सबसे चुनौतीपूर्ण थाना कोतवाली का भी कुशलता पूर्वक प्रभार में संभाला, अपराधियों की नकेल कसी और जनता में पुलिस का विश्वास जगाया। पिछले 15 महीनों से नौरोजाबाद में भी वही कहानी – ईमानदारी, अनुशासन और त्वरित न्याय के लिये सतत प्रयास रत देखें जाते हैं

फिर अचानक एकाएक पिछले एक-दो महीने से क्या हुआ कि उनके खिलाफ कतिपय लोग कीचड़ उछालने और शिकायतों की बाढ़ आ गई? शिकायत भी ऐसी कि कोई कहता है साहब उमरिया में पढ़ते रहे हैं, तो कोई कहता है भ्रष्ट हैं। पर इन शिकायतों की पोल तब खुलती है जब पता चलता है कि एक भी शिकायतकर्ता नौरोजाबाद का नहीं, उमरिया का भी नहीं। सारे शिकायती पत्र पन्ना और शहडोल से पोस्ट हो रहे हैं। अब शहडोल और पन्ना वाले नौरोजाबाद थाने से कैसे दुखी हो पन्ना पलट रहे हैं

विभाग के भीतर भी इस जन चर्चा बनी हुई है कि शिकायतें शिकायत नहीं,यह तो एक सोची समझी साजिश का ही हिस्सा हैं। उन चेहरों की साजिश, जो खुद नौरोजाबाद की कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे थे, पर अपनी भ्रष्ट और दागदार छवि के कारण उस कुर्सी तक पहुंच नहीं पाए। जब काबिलियत से कुर्सी नहीं मिली, तो साजिश से कुर्सी हथियाने की कोशिश शुरू कर दी

आज स्थिति यह है कि एक तरफ जनता और पूरे स्टाफ के दिलों में बसे बालेन्द्र शर्मा अपनी स्वच्छ छवि के साथ सीना तान कर खड़े हैं, तो दूसरी तरफ पर्दे के पीछे बैठे कुछ लोग झूठे लोग ही आस्तीन के सांप बन बैठे है, और अपने कुछ मोहरों को फिट कर शिकायती पत्रों से एड़ी-चोटी का जोर लगा दुसरो को भी बदनाम करने के लिये जुटे हुए है

इसीलिए उमरिया पुलिस लाइन में किसी से भी इस साजिश के बारे में पूछो तो हर जुबां पर एक ही जवाब और चेहरे पर एक ही मुस्कान होती है कि —यह तो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की चाल है

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