ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी
आरक्षण पास हुआ, तो लागू होने में देरी क्यों रही सरकार, महिलाओं को राजनीति में लाने नींव पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला महिला महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
धार। महिला आरक्षण बिल को लेकर महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव प्रीति माहेश्वरी ने कहा कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन का खेल खेलकर महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित करना चाहती है।
आरक्षण पास हुआ, तो लागू होने में देरी क्यों
प्रीति माहेश्वरी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा द्वारा जनता के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल को रोका। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में ही पास हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है और बिल कानून बन चुका है, तो इसे वर्तमान की 543 सीटों पर तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा रहा। भाजपा सरकार परिसीमन और जनगणना की आड़ लेकर इस बिल को भविष्य के लिए टाल रही है। हमारी मांग है कि 33 प्रतिशत आरक्षण आज और अभी से लागू हो।
कांग्रेस की विचारधारा रही है महिला सशक्तिकरण
माहेश्वरी ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में लाने की असल नींव पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने रखी थी। उन्हीं की पहल पर पंचायती राज और स्थानीय निकायों में महिलाओं को भागीदारी मिली। उन्होंने आगे कहा कि 2009 में सोनिया गांधी के प्रयासों से इसे राज्यसभा में लाया गया और 2019 में राहुल गांधी ने भी इसे पुरजोर तरीके से उठाया।
महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुखता से ओबीसी वर्ग की महिलाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 543 सीटों पर आरक्षण लागू करने में देरी कर रही है। कांग्रेस की मुख्य मांग है कि इस आरक्षण के भीतर ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी उनका उचित अधिकार और भागीदारी मिले, ताकि समाज का हर वर्ग नेतृत्व कर सके।
प्रीति माहेश्वरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा का महिला हितेषी होना एक ढोंग है। उन्होंने कहा, महिला कांग्रेस अब चुप नहीं बैठेगी। हम जिले की हर गली और घर-घर जाकर महिलाओं को बताएंगे कि बिल 2023 में पास होने के बावजूद सरकार की मंशा इसे लागू करने की नहीं है। हम सड़क से लेकर सदन तक महिलाओं के हक की लड़ाई जब तक लडेंगे तब उनका अधिकार नही मिलता।


















































