एमसीबी/झगराखाण्ड। नगर पंचायत की आगामी सामान्य सभा में जहां “नारी शक्ति अधिनियम” और महिला सशक्तिकरण पर चर्चा प्रस्तावित है वहीं इससे पहले ही इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष श्रीमती हेमलता कोमल कुमार ने परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब महिला जनप्रतिनिधियों को ही उनके अधिकार नहीं मिल रहे तो सशक्तिकरण की बातें केवल औपचारिक लगती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधोसंरचना मद से प्राप्त करीब 3 करोड़ रुपयों की विकास राशि के वितरण में गंभीर भेदभाव किया गया। परिषद में मौजूद अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला पार्षदों के वार्डों को एक भी विकास कार्य नहीं दिया गया जबकि अन्य प्रभावशाली वार्डों में बड़े पैमाने पर काम स्वीकृत और शुरू किये जा चुके हैं।
हेमलता कोमल कुमार ने कहा कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपयों के काम पहले ही कुछ वार्डों में प्रारंभ हो चुके हैं और शेष राशि भी उन्हीं क्षेत्रों में खर्च करने की तैयारी है। उन्होंने इसे राजनीतिक पक्षपात करार देते हुए कहा कि विपक्ष से चुनी गई महिला पार्षदों के साथ योजनाबद्ध तरीके से उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि “जब अपनी ही परिषद में महिलाओं के साथ समान व्यवहार नहीं हो रहा, तो नारी शक्ति अधिनियम पर चर्चा का क्या औचित्य है?”
नये सीएमओ की नियुक्ति का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि बची हुई राशि के आवंटन में निष्पक्षता दिखाई जायेगी और सभी वार्डों को समान रूप से विकास का अवसर मिलेगा। अंत में उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल एजेंडे का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखना चाहिये वरना यह सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जायेगा।

















































