इंटरनल सर्वे में बड़ा उलटफेर: मोदी के बाद दूसरे नंबर पर उभरे पंकज कुमार शर्मा, राहुल गांधी और केजरीवाल को पीछे छोड़ा

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इंटरनल सर्वे में बड़ा उलटफेर: मोदी के बाद दूसरे नंबर पर उभरे पंकज कुमार शर्मा, राहुल गांधी और केजरीवाल को पीछे छोड़ा

भारतीय लोकमत राष्ट्रवादी पार्टी के अध्यक्ष ने लोकप्रियता को बताया जनता के विश्वास और सकारात्मक राजनीति का परिणाम


नई दिल्ली/विशेष संवाददाता।
देश में सकारात्मक राजनीति और वैकल्पिक नेतृत्व को लेकर किए गए एक इंटरनल सर्वे में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, प्रधानमंत्री के बाद विपक्षी नेताओं की सूची में भारतीय लोकमत राष्ट्रवादी पार्टी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज कुमार शर्मा दूसरे स्थान पर उभरकर सामने आए हैं। इस सूची में उन्होंने प्रमुख विपक्षी चेहरों और को पीछे छोड़ दिया है।

सर्वे में सामने आया कि देश की जनता अब पारंपरिक राजनीति से हटकर सकारात्मक सोच, विकास आधारित दृष्टिकोण और राष्ट्रीय एकता की बात करने वाले नेताओं को प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में पंकज कुमार शर्मा का नाम तेजी से उभरता हुआ दिखा है।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए पंकज कुमार शर्मा ने इसे व्यक्तिगत सफलता न बताते हुए जनता के विश्वास और आशीर्वाद का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह सब माता महाकाली और भगवान भोलेनाथ की कृपा तथा देशवासियों के प्रेम और मार्गदर्शन से संभव हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अब देश की राजनीति बदल रही है और जनता ऐसे नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है जो दूरदर्शी हो और सकारात्मक दिशा में कार्य करे।

शर्मा ने वर्तमान युवा पीढ़ी की सोच पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का युवा जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से बाहर निकलकर एक समावेशी और विकसित भारत चाहता है। उनका मानना है कि भारतीय लोकमत राष्ट्रवादी पार्टी इसी सोच का प्रतिनिधित्व करती है और देश को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

उन्होंने अपनी पार्टी के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाना है। इसमें आईटी सेक्टर में नवाचार, उद्योग क्षेत्र में विस्तार, न्याय व्यवस्था में सुधार, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना शामिल है। उनके अनुसार, इन प्रयासों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

पंकज कुमार शर्मा ने उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी निशाना साधा जो जाति और धर्म की राजनीति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति देश के विकास में बाधा बनती है और इसका परिणाम अतीत में भी देखने को मिला है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1989 से 2014 के बीच बड़ी संख्या में व्यापारी वर्ग ने देश छोड़कर अन्य देशों का रुख किया, जिससे भारत को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने आर्थिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी राज्य या देश की प्रगति उसके वित्तीय लेन-देन और व्यापारिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। यदि व्यापार और उद्योग को बढ़ावा दिया जाए तो टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा और विकास की गति तेज होगी।

शर्मा ने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकारों की सीमाओं का जिक्र किया और कहा कि आजादी के बाद से अब तक सरकारी नौकरियां कुल जनसंख्या के केवल 3 से 5 प्रतिशत लोगों तक ही सीमित रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग व्यापार और निजी क्षेत्र के माध्यम से जीवनयापन कर रहे हैं। ऐसे में व्यापार और उद्योग को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी देश के 25 राज्यों में लगातार मेहनत कर रहे हैं और यही कारण है कि पार्टी का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है।

अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा और सकारात्मक राजनीति को आगे बढ़ाना होगा।

“जय हिंद, जय भारत” के संदेश के साथ उन्होंने अपने वक्तव्य का समापन किया।

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