हिमांशु जैन को एमसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार
एसईसीएल के सीवीओ अब संभालेंगे महानदी कोलफील्ड्स की सतर्कता कमान, पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी को मिलेगा नया आयाम
बिलासपुर।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के मुख्य सतर्कता अधिकारी ने महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण कर लिया है। भारतीय रेलवे सेवा (IRSSE) के वर्ष 2007 बैच के वरिष्ठ अधिकारी श्री जैन को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने से कोयला क्षेत्र की सतर्कता व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वर्तमान में एसईसीएल में मुख्य सतर्कता अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) में भी मुख्य सतर्कता अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। अब एमसीएल की सतर्कता व्यवस्था की कमान भी उनके हाथों में आने से कोल इंडिया की प्रमुख इकाइयों में सतर्कता तंत्र को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाए जाने की संभावना बढ़ गई है।
श्री जैन शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों ही क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने एनआईटी रायपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार अभियांत्रिकी में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की, वहीं आईआईटी बॉम्बे से एमटेक किया। वर्ष 2007 में संघ लोक सेवा आयोग की इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 प्राप्त कर उन्होंने भारतीय रेलवे सेवा (IRSSE) में प्रवेश किया।
अपने अब तक के सेवा कार्यकाल में ने भारतीय रेलवे की कई महत्वपूर्ण अवसंरचना और सिग्नलिंग परियोजनाओं का सफल नेतृत्व किया है। वे भारतीय रेल में उप-महाप्रबंधक (DGM), मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) तथा महाप्रबंधक के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी अपनी प्रशासनिक दक्षता का परिचय दे चुके हैं।
उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें राष्ट्रीय रेलवे पुरस्कार (2016), नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन रेलवे का महानिदेशक पदक (2019) तथा महाप्रबंधक पुरस्कार (2012 एवं 2022) प्रमुख हैं। प्रशासनिक कुशलता, तकनीकी दक्षता और नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक सक्षम और दूरदर्शी अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।
विशेष रूप से ‘DigiCOAL’ पहल के माध्यम से कोयला उद्योग में पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनकी यह पहल इतनी प्रभावशाली रही कि इसे केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की राष्ट्रीय कार्यशाला में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। DigiCOAL को कोयला क्षेत्र में सतर्कता प्रणाली के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एमसीएल में उनके अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करने से न केवल सतर्कता तंत्र को नई दिशा मिलेगी, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल मॉनिटरिंग की संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी। कोयला उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि के नेतृत्व में एमसीएल की सतर्कता प्रणाली अधिक आधुनिक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनेगी।















































