दहेज हत्या में पति, ससुर और देवर को उम्रकैद

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दहेज हत्या में पति, ससुर और देवर को उम्रकैद

कोतमा न्यायालय का बड़ा फैसला: नवविवाहिता रेखा केवट हत्याकांड में तीन दोषियों को आजीवन कारावास

कोतमा।
दहेज के लिए नवविवाहिता की हत्या के चर्चित मामले में कोतमा न्यायालय ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने थाना भालूमाड़ा के अपराध क्रमांक 587/22 में पति, ससुर और देवर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला नवविवाहिता रेखा केवट की दहेज के लिए हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे कोयलांचल क्षेत्र को झकझोर दिया था।

न्यायालय ने आरोपी मोहनलाल केवट (पति), बिहारीलाल केवट (ससुर) और तेजभान केवट (देवर) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201, 498ए तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी पाते हुए कठोर सजा सुनाई। अदालत ने हत्या के अपराध में तीनों को आजीवन कारावास, साक्ष्य मिटाने के अपराध में 5 वर्ष का सश्रम कारावास, क्रूरता के लिए 3 वर्ष का कारावास तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत 2 वर्ष का कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया।

अभियोजन के अनुसार रेखा केवट का विवाह 6 मई 2021 को मोहनलाल केवट से हुआ था। विवाह के लगभग छह से सात माह बाद से ही पति, ससुर और देवर द्वारा उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। आरोपीगण रेखा से दहेज में डनलप का गद्दा, एलईडी टीवी, 20 डिसमिल जमीन अथवा दोपहिया वाहन की मांग कर रहे थे। मृतका के पिता ने सामाजिक दबाव में एलईडी टीवी और गद्दा आरोपियों को दे भी दिया था, लेकिन शेष मांग पूरी न होने पर रेखा को लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

अभियोजन के अनुसार 10 नवंबर 2022 को आरोपियों ने मिलकर रेखा केवट की गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपियों ने मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए मृतका की साड़ी से फंदा बनाकर शव को लटका दिया और इसे आत्महत्या बताने का प्रयास किया। प्रारंभिक स्तर पर घटना को संदिग्ध आत्महत्या बताने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस की सूक्ष्म जांच, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और वैज्ञानिक विवेचना में यह स्पष्ट हो गया कि रेखा की हत्या की गई थी और साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया।

मामले की जांच के बाद पुलिस ने हत्या, साक्ष्य छिपाने, दहेज प्रताड़ना और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध किया।

प्रकरण में अभियोजन की ओर से विशेष रूप से प्रभावी पैरवी लोक अभियोजक वृंदा चौहान ने की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह स्थापित किया कि विवाह के डेढ़ वर्ष के भीतर नवविवाहिता की योजनाबद्ध हत्या की गई, जो दहेज लोभ की क्रूर और अमानवीय परिणति थी।

अपर सत्र न्यायाधीश ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले को दहेज हत्या के मामलों में एक महत्वपूर्ण और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

रेखा केवट हत्याकांड ने घटना के समय पूरे कोयलांचल क्षेत्र में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। अब न्यायालय के इस फैसले के बाद मृतका के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है। यह फैसला दहेज प्रथा और महिलाओं पर अत्याचार के विरुद्ध एक सख्त न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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