दंतैल हाथी का आतंक: युवती की मौत, बालक घायल
एक सप्ताह में दो महिलाओं की जान गई, तीन घायल; दहशत में ग्रामीण, जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
कोयला आंचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल
अनूपपुर, 30 अप्रैल।
अनूपपुर जिले में बीते कई दिनों से विचरण कर रहे दंतैल हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सीमा से अनूपपुर जिले में प्रवेश कर चुके इस आक्रामक हाथी ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी महिला की जान ले ली, जबकि एक बालक सहित तीन लोग घायल हो चुके हैं। लगातार हो रहे हमलों और ग्रामीण क्षेत्रों में मचे उत्पात से ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। वन विभाग की लगातार निगरानी और गश्त के बावजूद हाथी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ क्षेत्र में ‘पटका हाथी’ के नाम से पहचाना जाने वाला यह दंतैल हाथी विगत 27 दिनों से छत्तीसगढ़ की सीमा पार कर अनूपपुर जिले के विभिन्न ग्रामीण और वन क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। दिन के समय यह हाथी जंगलों और झाड़ियों में विश्राम करता है, जबकि शाम ढलते ही भोजन की तलाश में गांवों की ओर निकल पड़ता है। इस दौरान खेतों, बाड़ियों और ग्रामीणों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ यह हाथी लोगों पर हमलावर भी हो जाता है।
बुधवार रात लगभग 8 बजे यह हाथी ग्राम पंचायत सेंदुरी क्षेत्र में पहुंचा। सेंदुरी निवासी 17 वर्षीय संजय चर्मकार पिता हीरालाल चर्मकार, जो ठाकुरदेई तालाब की ओर से लौटकर पास में चल रहे विवाह समारोह में शामिल होने जा रहा था, अचानक हाथी के सामने आ गया। हाथी को देखते ही वह जान बचाने के लिए भागा, लेकिन लेंटाना की झाड़ियों में फंसकर गिर पड़ा। इसी दौरान हाथी ने उसे पैर से ठोकर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों और ग्रामीणों की मदद से उसे जिला चिकित्सालय अनूपपुर में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
रातभर हाथी सेंदुरी, अमगवां, छुलहा, नगदाहा, कोंडा, दुलहरा और पिपरिया सहित कई गांवों के टोला-मोहल्लों और खेत-खलिहानों में घूमता रहा। इस दौरान उसने ग्रामीणों की बाड़ियों में रखी सामग्री और फसलों को नुकसान पहुंचाया। गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे हाथी ग्राम पंचायत पिपरिया के कुसुमहाई गांव पहुंचा, जहां एक और दर्दनाक घटना सामने आई।
कुसुमहाई गांव निवासी 23 वर्षीय जानकी कोल पिता रामावतार कोल अपनी मां उजारिया बाई कोल के साथ घर से निकलकर खेत में सब्जियां तोड़ने जा रही थी। दोनों महिलाएं गांव के पास सीमेंट-कंक्रीट सड़क से होकर खेत की ओर बढ़ रही थीं, तभी पीछे से आए हाथी ने अचानक जानकी को अपनी सूंड से पकड़ लिया और पटक दिया। गंभीर रूप से घायल जानकी को तत्काल जिला चिकित्सालय अनूपपुर ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। साथ चल रही उसकी मां उजारिया बाई ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते एक सप्ताह में हाथी के हमले से दो महिलाओं की मौत हो चुकी है और तीन लोग घायल हुए हैं, लेकिन वन विभाग अब तक हाथी को आबादी से दूर रखने में सफल नहीं हो सका है। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की गश्ती टीम हाथी की गतिविधियों पर निगरानी तो रख रही है, लेकिन प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही। हाथी लगातार गांवों में घुसकर फसलें, अनाज, सब्जियां और अन्य घरेलू सामग्री नुकसान पहुंचा रहा है। कई बार ग्रामीणों और वन अमले पर हमलावर होने की कोशिश भी कर चुका है।
हाथी के बढ़ते आतंक को लेकर जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई है। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मध्यप्रदेश शासन के अनुसूचित जनजाति आयोग के नव नियुक्त प्रदेशाध्यक्ष एवं अनूपपुर के पूर्व विधायक ने हाथियों के बढ़ते आतंक को गंभीर बताते हुए प्रदेश स्तर के वन अधिकारियों और मुख्यमंत्री को घटना की जानकारी देकर तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की है।
वन विभाग ने हाथी के हमले में मृत युवती के परिजनों को अंतिम संस्कार हेतु प्रारंभिक सहायता राशि उपलब्ध कराई है, वहीं घायल युवक के उपचार के लिए भी आर्थिक सहायता दी गई है। विभाग का कहना है कि जिले में इस समय तीन अलग-अलग क्षेत्रों में पांच हाथियों का विचरण हो रहा है, जिन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों को लगातार सतर्क और सचेत रहने की अपील की जा रही है।
वन मंडल अधिकारी अनूपपुर ने जिले की जनता से अपील की है कि हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए अनावश्यक रूप से जंगल या सुनसान क्षेत्रों की ओर न जाएं। उन्होंने कहा कि हाथियों को जिले से बाहर निकालने के लिए शासन स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है और जैसे ही उच्च स्तर से दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसी अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लगातार हो रहे हमलों ने अनूपपुर जिले में वन्यजीव-मानव संघर्ष की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों को आबादी से दूर सुरक्षित वन क्षेत्र की ओर खदेड़ने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि और किसी परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।















































