भोपाल में राज्य स्तरीय सम्मेलन : लोकतंत्र, संविधान और जनसरोकारों पर उठी बुलंद आवाज़

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भोपाल में राज्य स्तरीय सम्मेलन : लोकतंत्र, संविधान और जनसरोकारों पर उठी बुलंद आवाज़

प्रशांत भूषण बोले – नए श्रम कानूनों से मजदूरों का होगा शोषण, किसानों और युवाओं का भविष्य संकट में

भोपाल। राजधानी भोपाल के लालघाटी क्षेत्र में 17 मई 2026 को एपीसीआर संस्था के नेतृत्व में एक विशाल राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश के वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हालातों पर गंभीर चर्चा की गई। सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध साहित्यकार , पूर्व सांसद अदिम साहब सहित अनेक बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वकील, लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता, छात्र-युवा एवं संविधान में विश्वास रखने वाले लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति रही। विशाल सभागार में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा ने कार्यक्रम को अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया।

मुख्य वक्ता प्रशांत भूषण ने देश की वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मजदूर, किसान और बेरोजगार युवा सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों के माध्यम से मजदूरों के अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को पूंजीपतियों के हाथों सौंपकर श्रमिक शोषण के रास्ते खोले जा रहे हैं। उन्होंने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की।

सम्मेलन में वामपंथी विचारक कामरेड शैलेंद्र शैली ने सांप्रदायिकता को देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बड़ा खतरा बताते हुए उपस्थित लोगों को सामाजिक एकता बनाए रखने का संदेश दिया। वहीं एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह ने प्रशांत भूषण से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते सस्ते तेल की खरीद नहीं होने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।

हरिद्वार सिंह ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लाखों छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक आम जनता बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर संघर्ष नहीं करेगी, तब तक सरकार जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं देगी। सम्मेलन में चुनाव प्रणाली और न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन का श्रेय एपीसीआर के नेशनल सेक्रेटरी जनाब नदीम खान एवं हजारों इंसाफ पसंद लोगों के सामूहिक प्रयासों को दिया गया। आयोजकों ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर इस प्रकार के सम्मेलन आगे भी आयोजित किए जाते रहेंगे।

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