भोलगढ़ के जंगल में हाथी का हमला, महिला की मौत; पति-पुत्र घायल
कोयलांचल समाचार के लिए शशिधर अग्रवाल की रिपोर्ट
अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर से महज 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बरबसपुर अंतर्गत भोलगढ़ के जंगल में रविवार दोपहर दर्दनाक हादसा हो गया। जंगल में विचरण कर रहे एक हाथी ने खेत से लौट रहे परिवार पर हमला कर दिया। हमले में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके पति और मासूम पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय अनूपपुर में भर्ती कराया गया है, जबकि हाथी देर शाम तक उसी जंगल क्षेत्र में विचरण करता रहा।
जानकारी के अनुसार भोलगढ़ निवासी समयलाल पाव का खेत चटुआ गांव के पास जंगल क्षेत्र में स्थित है। रविवार को परिवार के सदस्य खेत में काम करने गए थे। दोपहर करीब 3 बजे परिवार खेत से लौटकर जंगल के रास्ते भोलगढ़ गांव आ रहा था। इसी दौरान पगडंडी मार्ग के किनारे खड़े हाथी ने अचानक परिवार पर हमला कर दिया। हाथी ने 30 वर्षीय प्रेमवती पाव को सूंड से पटककर कुचल दिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
महिला को बचाने पहुंचे उसके 32 वर्षीय पति राममनोज पाव और 6 वर्षीय पुत्र दीपक पाव पर भी हाथी ने हमला कर दिया। दोनों को सूंड से उठाकर पटक दिया, जिससे वे घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घायलों को भोलगढ़ गांव लाकर निजी वाहन से जिला चिकित्सालय अनूपपुर भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला को मारने के बाद हाथी काफी देर तक घटनास्थल के आसपास खड़ा रहा, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। बाद में ग्रामीणों के शोर मचाने पर हाथी जंगल के भीतर दूसरी ओर चला गया, लेकिन देर शाम तक उसके उसी क्षेत्र में मौजूद रहने की सूचना मिलती रही।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई शुरू की। वन विभाग ने भोलगढ़, चटुआ, खांड़ा, पौड़ी, मानपुर, बरबसपुर, सोनटोला सहित हाथी प्रभावित गांवों में अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों से रात के समय घरों से बाहर न निकलने, जंगल की ओर न जाने और हाथी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।














































