संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक का बस स्टैंड जो कभी रीवा संभाग के सबसे सुंदर एवं व्यवस्थित बस अड्डों में गिना जाता था , आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को विवश है । लगभग वर्ष 1991 में प्रारंभ हुआ यह बस स्टैंड समय के साथ उपेक्षा का शिकार होकर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है जहां यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है ।
एक समय था जब अमरकंटक का यह बस स्टैंड स्वच्छता , सुव्यवस्था और सुविधाओं के लिए जाना जाता था किंतु वर्तमान में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है । बस स्टैंड परिसर में जगह-जगह टूटी खिड़कियां , जर्जर भवन , और उपेक्षित संरचनाएं इसकी बदहाली की कहानी स्वयं बयां कर रही हैं । साफ-सफाई का अभाव इतना अधिक है कि नालियां जाम होकर बदबू फैला रही हैं वहीं चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है ।
विशेष रूप से गर्मी के इस मौसम में यात्रियों के लिए पंखों , लाइटों की सुविधा की समुचित व्यवस्था न होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन गई है । दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक जो अमरकंटक की पावन भूमि पर पहुंचते हैं उन्हें बस स्टैंड पर ही असुविधाओं का सामना करना पड़ता है जिससे नगर की छवि भी धूमिल हो रही है ।
स्थानीय नागरिकों एवं यात्रियों का आरोप है कि प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल लंबे समय से उपेक्षित बना हुआ है । कई बार शिकायतों के बावजूद भी स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है ।
जनमानस की मांग है कि बस स्टैंड की स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल प्रभाव से साफ-सफाई , मरम्मत एवं मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि अमरकंटक आने जाने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और नगर की गरिमा भी बनी रहे ।














































