- कहीं गड्ढों का अंबार , कहीं पहाड़ियों का मलबा तो कहीं क्षतिग्रस्त पुलिया बनी मुसीबत ,
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक जो प्रदेश के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र है । अमरकंटक से छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को जोड़ने वाले चारों प्रमुख मार्गों की हालत बेहद खराब बनी हुई है । जर्जर सड़कें , गहरे गड्ढे , पहाड़ियों से आया मलबा और क्षतिग्रस्त पुलिया पर्यटकों , तीर्थयात्रियों , व्यापारियों , विद्यार्थियों , विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों-कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं । वर्षाकाल समाप्त होने के बाद भी मरम्मत नहीं होने से आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है ।
सड़कों की बदहाली के कारण कम दूरी तय करने में भी अधिक समय लग रहा है । कई स्थानों पर गड्ढों में पानी अभी भी भरा है , जबकि घाट वाले हिस्सों में बिखरी गिट्टी-मुरुम और क्षतिग्रस्त सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रही है ।
धर्मपानी-दुर्गाधारा-पकरिया और करंगरा मार्ग पर गड्ढों की भरमार
अमरकंटक से धर्मपानी , दुर्गाधारा और पकरिया होते हुए जाने वाला लगभग 25 किलोमीटर का मार्ग तथा करंगरा के रास्ते गौरेला-पेंड्रा जाने वाली सड़क क्षतिग्रस्त है । गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया , तिपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को परेशानी हो रही है । कई स्थानों पर वर्षा का पानी और पहाड़ियों से आया मलबा भी आवागमन में बाधा बन रहा है ।
जालेश्वर-डोकरगढ़ी-मदरवानी मार्ग भी जोखिम भरा
अमरकंटक से जालेश्वर , डोकरगढ़ी और मदरवानी होते हुए जाने वाला लगभग 35 किलोमीटर लंबा मार्ग भी बदहाल है । जगह-जगह गड्ढे , बिखरी गिट्टी-मुरुम और पहाड़ियों का मलबा वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा रहे हैं । इस दूरी को तय करने में डेढ़ से पौने दो घंटे तक लग रहे हैं । सड़क की खराब स्थिति से वाहनों को नुकसान पहुंचने और दुर्घटना की आशंका बनी हुई है ।
विश्वविद्यालय जाने वाले विद्यार्थी और कर्मचारी परेशान
अमरकंटक से विश्वविद्यालय क्षेत्र की ओर करंगरा घाट और झगराखांड होते हुए जाने वाला लगभग 40 किलोमीटर लंबा मार्ग भी बुरी तरह प्रभावित है । बताया जा रहा है कि वर्षाकाल में इसके करीब 15 किलोमीटर हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा है । विशेषकर घाट वाले हिस्से में सड़क टूटने से आवागमन कठिन हो गया है ।
इस मार्ग से विश्वविद्यालय आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं , प्रोफेसरों और कर्मचारियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है । पहले जहां सफर में लगभग डेढ़ घंटे लगते थे , वहीं अब दो घंटे या उससे अधिक समय लग रहा है ।
कबीर चबूतरा-क्योंची मार्ग पर पुलियों के जोड़ क्षतिग्रस्त
अमरकंटक से कबीर चबूतरा , आमाडोब और क्योंची होते हुए गौरेला-पेंड्रा तथा बिलासपुर की ओर जाने वाला लगभग 42 किलोमीटर लंबा मार्ग भी बदहाल है । कबीर घाट और क्योंची-गौरेला के बीच पुलियों के जोड़ वाले हिस्से क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं । यह मार्ग अमरकंटक को छत्तीसगढ़ के प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ने के साथ पर्यटन और व्यापार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है । इसकी खराब स्थिति से स्थानीय आवागमन के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं ।
पर्यटन और व्यापार पर पड़ रहा असर
अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल के दर्शन-पूजन और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए पश्चिम बंगाल , ओडिशा , झारखंड , छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचते हैं । अनेक श्रद्धालु गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र के पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन के माध्यम से अमरकंटक आते-जाते हैं ।
ऐसे में चारों प्रमुख मार्गों की बदहाल स्थिति यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन गई है । यात्रा में अधिक समय लगने , वाहनों के क्षतिग्रस्त होने और दुर्घटना की आशंका के कारण पर्यटकों , व्यापारियों तथा स्थानीय नागरिकों को असुविधा झेलनी पड़ रही है ।
मरम्मत की दरकार , प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा
वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों , घाटों और पुलियों की मरम्मत अब प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की आवश्यकता है । स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग चारों मार्गों का निरीक्षण कर गड्ढों की मरम्मत , मलबे की सफाई और क्षतिग्रस्त पुलियों को दुरुस्त कराने के लिए ठोस कदम उठाएं ।
अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल को पड़ोसी जिले से जोड़ने वाले इन महत्वपूर्ण मार्गों की बदहाली दूर करना जरूरी है ताकि पर्यटकों , तीर्थयात्रियों , विद्यार्थियों , व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके ।






































































