आगजनी और एससी-एसटी एक्ट के आरोपी को राहत नहीं
13 मामलों के आरोपी शैलेष उर्फ बल्लू शर्मा की जमानत याचिका खारिज, सत्र न्यायालय ने माना मामला गंभीर
अनूपपुर। आगजनी, जातिसूचक गाली-गलौज और अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के मामले में जेल में बंद आरोपी शैलेष उर्फ बल्लू शर्मा को अदालत से राहत नहीं मिली है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी।
जिला लोक अभियोजक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी शैलेष उर्फ बल्लू शर्मा (24) निवासी ग्राम शिवरी चंदास, राजेंद्रग्राम ने पुरानी रंजिश के चलते फरियादिया के घर के समीप बने रूधान (पशुशाला) में आग लगा दी। विरोध करने पर आरोपी ने फरियादिया के साथ जातिसूचक गाली-गलौज भी की। घटना के बाद पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल अनूपपुर भेज दिया गया।
मामले में पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 326(ए), 296(जी) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(5) के तहत अपराध दर्ज किया है।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से पैरवी करते हुए लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि आरोपी के विरुद्ध राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र में पहले से 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिससे उसका आपराधिक रिकॉर्ड स्पष्ट होता है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी को जमानत दिए जाने पर साक्ष्यों और गवाहों के प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए जमानत आवेदन निरस्त कर दिया। आरोपी 28 जून 2026 से जिला जेल अनूपपुर में निरुद्ध है।
लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि न्यायालय का यह आदेश गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने तथा पीड़ित पक्ष के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




































