कोतमा में गली-मोहल्लों तक फैला अवैध कबाड़ का कारोबार, प्रशासन मौन!

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  • कालरी के लोहे से लेकर चोरी के सामान तक खपाने के आरोप, कई स्थानों पर खुलेआम संचालित हो रहीं कबाड़ दुकानें

रिपोर्टर: भरत मिश्रा, कोतमा

कोतमा। नगर में अवैध कबाड़ का कारोबार एक बार फिर तेजी से फलने-फूलने लगा है। गली-मोहल्लों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कबाड़ की दुकानें संचालित होने की चर्चा है। कुछ समय पहले पुलिस की सख्ती के बाद कई कबाड़ दुकानों पर ताले लटक गए थे और लगभग एक महीने तक कारोबार बंद रहा। लेकिन अब एक बार फिर कई स्थानों पर कबाड़ का व्यवसाय खुलेआम संचालित होने लगा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन दुकानों पर जिम्मेदार विभागों की निगरानी क्यों नहीं हो रही है और कथित अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?

कई स्थानों पर संचालित हो रहीं कबाड़ दुकानें

कोतमा नगर और आसपास के क्षेत्रों में बनिया टोला, रोड अंडरब्रिज के पास, वार्ड क्रमांक 7 में शिशु भारती स्कूल के समीप, मनेंद्रगढ़ रोड स्थित केरहा नाला के पास, वार्ड क्रमांक 10 के विकास नगर, जनपद कार्यालय के आगे, कॉलेज तिराहा, बसखली तिराहा और कलमुड़ी गांव सहित कई स्थानों पर कबाड़ दुकानों के संचालन की बात सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर इन दुकानों की संख्या आधा दर्जन से अधिक बताई जा रही है।

कई दुकानों में कबाड़ सामग्री सड़क तक फैली रहने से आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है। सवाल यह है कि इन दुकानों में खरीदे जा रहे लोहे और अन्य धातुओं का स्रोत क्या है? क्या प्रत्येक दुकान में खरीदी-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखा जा रहा है? यदि कारोबार वैध है, तो इसकी नियमित जांच और दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया जाता?

कालरी के लोहे की खरीद-बिक्री पर उठ रहे सवाल

कोतमा क्षेत्र में कोयला खदानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से लोहे तथा अन्य सामग्री की चोरी की घटनाओं को लेकर समय-समय पर चिंताएं सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि चोरी से प्राप्त कुछ सामग्री कबाड़ दुकानों के माध्यम से खपाई जाती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दुकानों की जांच और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई से ही हो सकती है।

यदि चोरी का लोहा कबाड़ के कारोबार तक पहुंच रहा है, तो इसके पीछे केवल चोरी करने वाले ही नहीं, बल्कि चोरी की सामग्री खरीदने वाले नेटवर्क की भी जांच आवश्यक है। कबाड़ कारोबार में खरीदी गई सामग्री के स्रोत, विक्रेता की पहचान, बिल और स्टॉक का मिलान करने से संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।

कबाड़ दुकानों की बढ़ती संख्या के साथ चोरी की घटनाओं पर चिंता

नगर के गली-मोहल्लों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी कबाड़ दुकानों के बढ़ते संचालन को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है। नागरिकों का सवाल है कि यदि दुकानों में नियमित रूप से बड़ी मात्रा में लोहा और अन्य धातुएं खरीदी जाती हैं, तो उनकी आवक और वैध स्रोत की जांच कौन कर रहा है?

कालरी क्षेत्र में लोहे की चोरी, वाहनों और अन्य सामान की चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चोरी की सामग्री की खरीद-बिक्री करने वाले संभावित ठिकानों की जांच भी जरूरी है। हालांकि, कबाड़ दुकानों की संख्या बढ़ने और चोरी की घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए पुलिस को तथ्यों के आधार पर जांच करनी होगी।

कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता का आरोप

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस लगातार प्रयास करने का दावा करती है, लेकिन संदिग्ध कबाड़ कारोबार की नियमित जांच कितनी प्रभावी है? पूर्व में कार्रवाई के बाद बंद हुई दुकानें यदि फिर से संचालित हो रही हैं, तो उनके दस्तावेजों, लाइसेंस और खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन किया जाना चाहिए।

सिर्फ छिटपुट कार्रवाई से इस तरह के कारोबार पर स्थायी रोक लगाना मुश्किल हो सकता है। इसके लिए पुलिस, प्रशासन और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के सुरक्षा विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।

स्टॉक रजिस्टर के भरोसे कारोबार, सत्यापन जरूरी

कबाड़ कारोबार में खरीदी-बिक्री का रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल स्टॉक रजिस्टर का होना ही किसी सामग्री के वैध होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों का वास्तविक माल, खरीद के दस्तावेजों और विक्रेता की पहचान से मिलान होना भी जरूरी है।

यदि किसी दुकान में चोरी की सामग्री मिलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, संदिग्ध माल की आपूर्ति करने वाले व्यक्तियों और उसके आगे के नेटवर्क की जांच भी आवश्यक है।

जिम्मेदार विभागों से कार्रवाई की अपेक्षा

कोतमा नगर में कबाड़ कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा है कि वे संबंधित दुकानों का नियमानुसार निरीक्षण कराएं। दुकानों के दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, खरीदी-बिक्री के बिल और सामग्री के स्रोत की जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई हो तथा वैध कारोबार करने वालों को अनावश्यक परेशानी न हो।

अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कथित अवैध कबाड़ कारोबार पर प्रभावी निगरानी के लिए क्या कदम उठाते हैं। नगरवासियों को उम्मीद है कि जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चोरी की सामग्री की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए ठोस कार्रवाई भी होगी।

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