कबाड़ एम्बुलेंस बनी स्वास्थ्य जागरूकता की कलात्मक पहचान, ECL ने दिया ‘वेस्ट टू आर्ट’ का संदेश

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  • स्पेशल कैंपेन 6 के तहत सैंक्तोरिया अस्पताल परिसर में अनूठी पहल, अनुपयोगी सामग्री से पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण का संदेश

सैंक्तोरिया/आसनसोल। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के रचनात्मक उपयोग की दिशा में एक अनूठी पहल की है। कंपनी के स्पेशल कैंपेन 6 के अंतर्गत सैंक्तोरिया अस्पताल परिसर में लंबे समय से अनुपयोगी हो चुकी एम्बुलेंस को आकर्षक कलात्मक स्थापना के रूप में नया स्वरूप दिया गया है। इस पहल के माध्यम से कबाड़ समझी जाने वाली वस्तुओं के पुनः उपयोग के साथ स्वास्थ्य जागरूकता और सतत विकास का संदेश दिया जा रहा है। ईसीएल की यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल के माध्यम से अनुपयोगी सामग्रियों को भी समाज के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।

अनुपयोगी एम्बुलेंस को मिला नया स्वरूप

सैंक्तोरिया अस्पताल परिसर में स्थापित की गई यह कलात्मक एम्बुलेंस ‘वेस्ट टू आर्ट’ यानी अपशिष्ट से कला की अवधारणा का उदाहरण है। सामान्य तौर पर उपयोग से बाहर हो चुकी वस्तुओं को कबाड़ मानकर हटा दिया जाता है, लेकिन ईसीएल ने इसी सोच से आगे बढ़ते हुए पुरानी एम्बुलेंस को एक रचनात्मक पहचान प्रदान की है। अब यह वाहन अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और संसाधनों के बेहतर उपयोग का संदेश देने वाली कलात्मक स्थापना के रूप में दिखाई देगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल अस्पताल परिसर की सुंदरता बढ़ाना नहीं है, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि अनुपयोगी सामग्री का उचित नियोजन और रचनात्मक पुनः उपयोग करके उसे नया उद्देश्य दिया जा सकता है। इससे अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है और अनावश्यक रूप से संसाधनों को बेकार होने से बचाने की सोच विकसित होती है।

सीएमडी डॉ. सतीश झा ने किया अनावरण

ईसीएल के सैंक्तोरिया अस्पताल परिसर में तैयार की गई इन कलात्मक स्थापनाओं का अनावरण कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डॉ. सतीश झा ने किया। इस अवसर पर कंपनी के कार्यात्मक निदेशक भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में निदेशक (वित्त) एम.डी. अंजार आलम, निदेशक (कार्मिक) गुंजन कुमार सिन्हा, निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) गिरिश गोपीनाथन नायर तथा निदेशक (तकनीकी संचालन) चित्तरंजन कुमार उपस्थित थे। इसके अलावा सैंक्तोरिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा ईसीएल के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

अस्पताल परिसर में इस प्रकार की कलात्मक स्थापना तैयार करना संस्थागत परिसरों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को प्रदर्शित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सोदपुर सेंट्रल वर्कशॉप की टीम ने दिखाई शिल्पकला

इस रचनात्मक पहल को साकार करने में ईसीएल की सोदपुर सेंट्रल वर्कशॉप की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने अनुपयोगी एम्बुलेंस को नया कलात्मक स्वरूप देने के साथ अस्पताल परिसर के लिए कोल इंडिया के प्रतीक चिह्न को भी कलात्मक रूप प्रदान किया।

टीम की शिल्पकला, तकनीकी दक्षता और नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण ने यह दिखाया कि उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग करके परिसर के सौंदर्यीकरण के साथ सामाजिक संदेश भी प्रसारित किया जा सकता है। इस प्रकार की पहल संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की रचनात्मक क्षमता को सामने लाने के साथ अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।

स्वास्थ्य जागरूकता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर

अस्पताल परिसर में स्थापित यह कलात्मक एम्बुलेंस स्वास्थ्य जागरूकता को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ती है। अस्पताल जैसे स्थान पर इस तरह की स्थापना लोगों का ध्यान आकर्षित करने के साथ यह संदेश देने का माध्यम बन सकती है कि स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

वेस्ट-टू-आर्ट की अवधारणा का मूल उद्देश्य ऐसी वस्तुओं को नया उपयोग देना है, जो अपने पारंपरिक उद्देश्य के लिए अनुपयोगी हो चुकी हों। इससे संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल, पुनः उपयोग और अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। ईसीएल की यह पहल इसी सोच को संस्थागत परिसर में व्यावहारिक रूप देने का प्रयास है।

स्पेशल कैंपेन 6 के उद्देश्यों के अनुरूप पहल

ईसीएल द्वारा की गई यह पहल स्पेशल कैंपेन 6 की मूल भावना के अनुरूप है। इस अभियान में स्वच्छता को प्रोत्साहित करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करने, परिसर में मौजूद स्थान का बेहतर उपयोग करने और अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।

पुरानी एम्बुलेंस को कलात्मक स्थापना में बदलना इस बात का उदाहरण है कि अभियान के उद्देश्यों को केवल सफाई या कबाड़ हटाने तक सीमित न रखते हुए रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा सकता है। इससे कर्मचारियों और आम लोगों के बीच संसाधनों के पुनः उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने का अवसर मिलता है।

कबाड़ से उपयोगिता तक, सतत विकास का संदेश

सैंक्तोरिया अस्पताल परिसर में अब यह अनुपयोगी एम्बुलेंस केवल एक पुराना वाहन नहीं रह गई है, बल्कि रचनात्मकता और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन का प्रतीक बन गई है। यह पहल बताती है कि सतत विकास के लिए हमेशा नए संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। कई बार पहले से उपलब्ध वस्तुओं में नई संभावनाएं तलाशकर भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

ईसीएल की यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और नवाचार को एक साथ जोड़ती है। ‘वेस्ट टू आर्ट’ की यह अवधारणा न केवल संस्थागत परिसरों को नया रूप देने का माध्यम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि सही सोच और प्रयास से अनुपयोगी वस्तुओं को भी सार्थक पहचान दी जा सकती है

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