साहित्य समाज को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम : श्याम बिहारी जायसवाल

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  • कोरिया साहित्य महोत्सव के चौथे संस्करण का शुभारंभ, संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजन को नियमित स्वरूप देने की पहल
  • 38 कवियों ने किया काव्य पाठ, लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और साइबर अपराध पर हुई परिचर्चा

बैकुंठपुर। शब्दों की शक्ति, लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत और रचनात्मक अभिव्यक्ति के संगम के रूप में कोरिया साहित्य महोत्सव का चतुर्थ संस्करण शनिवार शाम झुमका ओपन थियेटर में शुरू हुआ। छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर दो दिवसीय आयोजन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने साहित्य को समाज की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति बताते हुए कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से जनचेतना जागृत करते हैं और समाज को लोकहित के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर कलेक्टर रोक्तिमा यादव, एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद तथा वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव और देवेंद्र तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आयोजन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साहित्यकारों, कवियों, कलाकारों, अधिकारियों और साहित्य प्रेमियों ने भागीदारी निभाई।

साहित्य से वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी होता है समृद्ध

मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन या अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज को सही दिशा देने और आने वाली पीढ़ियों के विचारों को आकार देने का महत्वपूर्ण आधार है। साहित्यकार अपनी लेखनी से जनमानस में जागरूकता पैदा करते हैं और सामाजिक मूल्यों को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं।
उन्होंने कहा कि कोरिया साहित्य महोत्सव ने कम समय में प्रदेश स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यहां साहित्य के साथ लोककला, संस्कृति और रचनात्मक प्रतिभाओं को एक साझा मंच मिल रहा है। आयोजन समिति की पहल की सराहना करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि महोत्सव को संस्कृति विभाग के सहयोग से नियमित रूप से आयोजित कराने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिल रहा बड़ा मंच

कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कहा कि साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। ऐसे मंच अनुभवी साहित्यकारों और नई पीढ़ी के बीच संवाद स्थापित करते हैं जिससे युवाओं को सीखने और अपनी रचनात्मकता विकसित करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने महोत्सव में विभिन्न विषयों पर आयोजित कार्यक्रमों की सराहना करते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।
एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद ने कहा कि एसईसीएल आयोजन के पहले वर्ष से ही इससे जुड़ा हुआ है। उन्होंने खेल, कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिये हरसंभव सहयोग जारी रखने की बात कही साथ ही महोत्सव के चार संस्करण पूरे होने पर आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई दी।

कविता, लोककला और विचारों से सजी पहली शाम

महोत्सव के पहले दिन साहित्य और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। प्रदेश के 38 कवियों ने काव्य पाठ के माध्यम से अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। पांच स्थानीय कलाकारों के साथ सुंदरपुर विद्यालय और कन्या महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में साहित्यिक प्रस्तुतियों के साथ जनहित से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई। शिक्षा पर जितेंद्र गुप्ता, स्वास्थ्य पर सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल और साइबर अपराध पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने परिचर्चा सत्रों में अपने विचार रखे। विषय विशेषज्ञों ने संबंधित क्षेत्रों की गतिविधियों और जनभागीदारी के महत्व पर जानकारी साझा की।
दुर्ग से पहुंचे डॉ. ऊषा साहू समूह ने लोकरंग की प्रस्तुति से कार्यक्रम में हास्य और मनोरंजन का रंग भरा। देर रात तक चली प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा।

साहित्यकारों और कला प्रेमियों की रही सहभागिता

महोत्सव के पहले दिन अविभाजित कोरिया जिले के वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव, सतीश उपाध्याय, सुंदर लाल तिवारी और डॉ. राजकुमार शर्मा सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। सूरजपुर से प्रोफेसर बृजलाल साहू और डॉ. ओंकार साहू ने भी सहभागिता की।
इसके अलावा एसडीएम बैकुंठपुर दीपिका नेताम, तहसीलदार पटना रोशनी तिर्की, तहसीलदार बैकुंठपुर प्रांजल मिश्रा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आये साहित्यकारों, कवियों और संस्कृति प्रेमियों ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
कोरिया साहित्य महोत्सव का चतुर्थ संस्करण जिले की साहित्यिक पहचान को विस्तार देने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं, लोक परंपराओं और समकालीन सामाजिक विषयों को एक मंच पर जोड़ने की पहल के रूप में सामने आया है। कविता, कला, संवाद और लोक संस्कृति से सजी इस शुरुआत ने महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों के लिये भी उत्साहपूर्ण माहौल तैयार किया।

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