- संत-महात्माओं,नर्मदा मंदिर के पुजारियों,दुर्गा उत्सव समितियों और श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति , देर रात तक चला प्रतिमा विसर्जन
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में विजयादशमी का पर्व श्रद्धा , उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया । इस अवसर पर भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात रावण के पुतले का दहन किया गया । रावण दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया ।

कार्यक्रम में शांति कुटी आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज , नगर परिषद अध्यक्ष , नायब तहसीलदार विनोद सिंह परिहार , मुकुंद प्रधान , थाना प्रभारी के एन बंजारे सहित जनप्रतिनिधि , गणमान्य नागरिकों ने भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण का पूजन किया ।
इस अवसर पर भगवान श्रीराम की वेशभूषा में पंडित आयुष्मान द्विवेदी तथा लक्ष्मण के रूप में अभय सिंह ने अपनी भूमिका निभाई । दोनों बच्चों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया ।

रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी एवं श्रद्धालु एकत्रित हुए । धार्मिक वातावरण के बीच भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा ।
कार्यक्रम में नगर के संत-महात्माओं , मां नर्मदा मंदिर के पुजारियों , विभिन्न दुर्गा उत्सव समितियों के सदस्यों , जनप्रतिनिधियों तथा नगरवासियों की उपस्थिति रही ।
श्रीराम के आदर्शों पर चलने का दिया संदेश
रावण दहन से पूर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए शांति कुटी आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आदर्शों , मर्यादाओं और आचरण से समाज को धर्म की रक्षा करने तथा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी गई है । रावण दहन की परंपरा बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का प्रतीक है । विजयादशमी का पर्व हमें सत्य , धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है । अमरकंटक में नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना के बाद विजयादशमी पर धार्मिक आयोजनों के साथ शारदीय नवरात्रि का समापन हुआ । पूरे नगर में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला ।
14 स्थानों पर विराजमान हुईं दुर्गा प्रतिमाएं , पहली बार डीजे की धूम ने खींचा ध्यान
अमरकंटक नगर के विभिन्न वार्डों में लगभग 14 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं । नवरात्रि के दौरान विभिन्न पंडालों में भजन संध्या , देवी गीत और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए । विजयादशमी के अवसर पर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया ।
विसर्जन के दौरान डीजे संगीत और धूमधाम देखने को मिली । नगरवासियों के बीच चर्चा रही कि विभिन्न समितियों के बीच डीजे की धूम मानो किसी प्रतियोगिता जैसी दिखाई दे रही थी । हालांकि तेज संगीत और डीजे की अत्यधिक धूम को लेकर नगर के कुछ संत-महात्माओं एवं नागरिकों ने नाराजगी भी जताई । उनका मानना था कि धार्मिक आयोजनों में भक्ति , मर्यादा और शांति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए ।
निर्धारित समय के बाद भी आधी रात तक चलता रहा प्रतिमा विसर्जन
अमरकंटक में प्रतिवर्ष दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी सैकड़ों प्रतिमाएं लाई जाती हैं , जिनका निर्धारित विसर्जन स्थल पर विसर्जन किया जाता है । वहीं नगर की स्थानीय दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी देर रात तक चलता रहता है । इस बार भी विसर्जन की प्रक्रिया आधी रात तक जारी रही । समय सीमा पार होने के कारण
प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई । स्थानीय स्तर पर विसर्जन कार्यक्रमों को निर्धारित समय के भीतर संपन्न कराने की आवश्यकता महसूस की गई , ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही प्रशासनिक अमले को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े ।
विसर्जन स्थल पर प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अमरकंटक स्थित विसर्जन कुंड पर प्रशासन की विशेष निगरानी रही । नगर परिषद अमरकंटक की टीम , पुलिस विभाग का दल , राजस्व विभाग , एसडीआरएफ की टीम तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि सहित संबंधित अमला मौजूद रहा । प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं पर नजर रखी गई , ताकि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके । इस बार लगभग 79 प्रतिमाएं विसर्जित की गईं ।







































































