लोकेशन धार रिपोर्टर शैलेंद्र जोशी
धार की अधिष्ठात्री हैं गढ़ कालिका माता, उल्टा साथिया से पूरी होती है मन्नत
वेदर रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी
धार शहर की पश्चिम दिशा में देवी सागर तालाब के पास ऊँची पहाड़ी पर स्थित है प्राचीन गढ़ कालिका माता मंदिर। प्राचीन काल से इस पहाड़ी को कालिकागढ़ कहा जाता है। मंदिर का पाषाण शिखर परमार शैली का है, जो इसके अति प्राचीन होने का प्रमाण है। शिखरबंद मंदिर और सामने पत्थर की दीपमालिका इसकी स्थापत्य विशेषता है।
कालिका माता धार के परमार राजवंश की कुलदेवी और नगर की अधिष्ठात्री देवी हैं। प्रतिदिन सैकड़ों भक्त दर्शन को आते हैं। शारदीय नवरात्रि में दशहरे की रात हजारों लोग शमी अर्पण के लिए पहुंचते हैं।
परंपरा अनुसार यहां प्रतिदिन छह आरतियां होती हैं। पहली आरती सुबह चार बजे काकड़ आरती होती है, जिसके बाद मिश्री का प्रसाद मिलता है। सामान्य दिनों में माता का श्रृंगार रोज बदलता है, लेकिन नवरात्रि में नौ दिन श्रृंगार नहीं बदला जाता।
मंदिर की अनोखी मान्यता है। मनोकामना लेकर आए भक्त मंदिर के पीछे गोबर या कुंकू-हल्दी से उल्टा साथिया बनाते हैं। मान्यता है कि मन्नत पूरी होने पर भक्त वापस आकर उसी साथिये को सीधा कर आस्था प्रकट करते हैं। शुक्रवार और मंगलवार को विशेष भीड़ रहती है।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में महाराष्ट्र-गुजरात सहित दूर-दूर से भक्त आते हैं। शारदीय नवरात्रि में नगर पालिका द्वारा नौ दिवसीय मेला लगाया जाता है, जिसमें गरबा, धार्मिक कार्यक्रम और प्रसिद्ध गोंद पापड़ मुख्य आकर्षण होते हैं।






































































