मध्यप्रदेश बनेगा माइस और एडवेंचर टूरिज्म का बड़ा केंद्र, 2027 होगा ‘एडवेंचर ईयर’

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मध्यप्रदेश बनेगा माइस और एडवेंचर टूरिज्म का बड़ा केंद्र, 2027 होगा ‘एडवेंचर ईयर’

भोपाल-इंदौर में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी, ओरछा-खजुराहो में डेस्टिनेशन वेडिंग को मिलेगा बढ़ावा

एमपीटीएम-2026 में पर्यटन विकास की रणनीति पर मंथन, सुरक्षा मानकों के साथ विकसित होंगे एडवेंचर हब

अनूपपुर। मध्यप्रदेश को देश में माइस (MICE) और एडवेंचर टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने रणनीतिक पहल तेज कर दी है। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम)-2026 के दूसरे दिन भोपाल में आयोजित दो महत्वपूर्ण सत्रों में प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं, बड़े आयोजनों, डेस्टिनेशन वेडिंग और साहसिक पर्यटन के विस्तार पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं इंडिया कन्वेंशन प्रमोशन ब्यूरो के चेयरमैन हरिकिशोर एस. ने कहा कि इंदौर और भोपाल में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के प्रमुख केंद्र बनने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य में सिटी माइस प्रमोशन ब्यूरो के गठन, राज्य स्तरीय माइस रणनीति तैयार करने और बड़े कन्वेंशन सेंटर विकसित करने का सुझाव दिया।

उन्होंने बताया कि भारत का माइस बाजार लगभग 37,576 करोड़ रुपये का हो चुका है, जबकि लाइव इवेंट्स क्षेत्र के वर्ष 2028 तक 19,600 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग मध्यप्रदेश के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

डेस्टिनेशन वेडिंग से बढ़ेंगे पर्यटन के अवसर

माइस एवं क्रिएटिव इकोनॉमी सत्र में फिक्की माइस टूरिज्म कमेटी के अध्यक्ष एवं विजक्राफ्ट ग्रुप के सह-संस्थापक सब्बास जोसेफ ने मध्यप्रदेश की अनुभव आधारित पर्यटन अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने ओरछा, खजुराहो, महेश्वर, मांडू और ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को डेस्टिनेशन वेडिंग और भव्य समारोहों के लिए उपयुक्त बताया।

उन्होंने वेडिंग प्लानर्स के लिए परिचयात्मक भ्रमण आयोजित करने, प्रमाणित विवाह स्थलों एवं सेवा प्रदाताओं की सूची तैयार करने और स्थानीय व्यंजन, कला-संस्कृति, हथकरघा तथा हस्तशिल्प को शामिल करते हुए विशेष समारोह पैकेज विकसित करने पर जोर दिया।

 2027 में साहसिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

एडवेंचर टूरिज्म-2030 विषय पर आयोजित राउंडटेबल में मध्यप्रदेश को साहसिक पर्यटन के अग्रणी केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। पर्यटन विभाग के सचिव एवं मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने वर्ष 2027 को ‘एडवेंचर ईयर’ के रूप में ध्यान में रखते हुए साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने की बात कही।

सत्र के मुख्य वक्ता पद्मश्री अजीत बजाज ने एडवेंचर पार्क और पर्यटन अधोसंरचना विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने अलग-अलग गतिविधियों के बजाय समग्र एडवेंचर हब विकसित करने तथा पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि प्रमाणित गाइड, गतिविधिवार मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), आपातकालीन बचाव व्यवस्था और चिकित्सा बीमा जैसी सुविधाएं साहसिक पर्यटन के विकास के लिए आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर और संयुक्त संचालक (एडवेंचर) संतोष कुमार श्रीवास्तव सहित पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ एवं उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे। विशेषज्ञों के विचार-विमर्श से प्रदेश में पर्यटन के नए अवसर विकसित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की संभावनाओं को बल मिला।

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