शारदा ओसियम में कंपनी पर कथित दबाव, भाजपा के नाम के इस्तेमाल से उठे सवाल
चार साइट का आवंटन, मिली सिर्फ एक; 50% रोजगार देने के बावजूद काम बंद कराने की कथित धमकी, कंपनी ने पूर्व शिकायत का किया दावा
शहडोल। जिले के सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत शारदा ओसियम में कार्यरत आरके अर्थ रिसोर्स कंपनी को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कंपनी की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, कामाख्या नामक व्यक्ति द्वारा स्वयं को भाजपा से जुड़ा छोटा कार्यकर्ता बताते हुए अथवा भाजपा का नाम लेकर कंपनी पर लगातार अनर्गल दबाव बनाया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि दबाव के चलते उसे काम बंद करने की धमकियां तक दी जा रही हैं
कंपनी के अनुसार, कोल माइंस प्रबंधन द्वारा उसे कुल चार साइटों का कार्य आवंटित किया गया था, लेकिन वास्तविक रूप से अब तक केवल एक साइट ही उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद संबंधित पक्ष की मांग पर कंपनी द्वारा लगभग 50 प्रतिशत लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में कंपनी पर लगातार दबाव बनाए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं
एक साइट मिली, फिर भी काम बंद कराने का दबाव क्यों?
कंपनी का कहना है कि जब चार में से केवल एक साइट पर काम करने की स्थिति बनी है, तब भी उस पर अतिरिक्त दबाव बनाया जाना समझ से परे है। कंपनी के मुताबिक, यदि कथित दबाव के कारण कार्य बाधित होता है तो उसे लाखों-करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हो सकती है।
सवाल यह भी है कि स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के बावजूद कंपनी को परेशान करने की कथित कोशिश आखिर किस उद्देश्य से की जा रही है? यदि कंपनी के कार्य में कोई वैधानिक या तकनीकी कमी है तो संबंधित विभाग द्वारा लिखित रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि कथित रूप से किसी राजनीतिक पहचान या प्रभाव का हवाला देकर दबाव बनाया जाना चाहिए
भाजपा के नाम के इस्तेमाल पर पार्टी की छवि को लेकर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू भाजपा के नाम के कथित इस्तेमाल को लेकर सामने आया है। कंपनी का आरोप है कि कामाख्या नामक व्यक्ति द्वारा भाजपा से जुड़े होने का हवाला देकर उस पर दबाव बनाया जा रहा है।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो सवाल केवल कंपनी पर दबाव का नहीं, बल्कि किसी राजनीतिक दल के नाम और पहचान के कथित दुरुपयोग का भी बनता है। भाजपा एक राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन है। ऐसे में किसी स्थानीय विवाद में पार्टी के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने से पार्टी की सार्वजनिक छवि पर भी सवाल उठ सकते हैं
हालांकि, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कामाख्या का भाजपा से वास्तविक संगठनात्मक संबंध क्या है और क्या उन्हें पार्टी की ओर से किसी प्रकार की अधिकृत जिम्मेदारी प्राप्त है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में पार्टी के अधिकृत पदाधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
पहले भी शिकायत का दावा, फिर क्यों नहीं रुका कथित दबाव?
आरके अर्थ रिसोर्स कंपनी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि इससे पहले भी कथित ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाए जाने के संबंध में संबंधित थाने में शिकायत की जा चुकी है। यदि शिकायत वास्तव में दर्ज हुई है, तो पुलिस को उसके आधार पर हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए
कंपनी का आरोप है कि पूर्व शिकायत के बावजूद कथित दबाव का सिलसिला जारी है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के सामने यह सवाल खड़ा होता है कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और यदि आरोप निराधार थे तो उन्हें जांच के बाद स्पष्ट क्यों नहीं किया गया?
प्रशासन के सामने जांच के कई बिंदु
पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के दौरान यह स्पष्ट होना चाहिए कि—
कंपनी को वास्तव में कितनी साइटों का कार्य आवंटित हुआ?
चार साइटों के मुकाबले केवल एक साइट उपलब्ध कराए जाने का कारण क्या है?
कंपनी द्वारा 50 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने का दावा कितना सही है?
कंपनी के विरुद्ध किसी विभाग की कोई आधिकारिक शिकायत या आपत्ति है या नहीं?
पूर्व में पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?
कंपनी पर दबाव डालने के आरोपों की वास्तविकता क्या है?
और सबसे अहम, क्या किसी राजनीतिक दल के नाम या पहचान का कथित रूप से निजी विवाद में इस्तेमाल किया जा रहा है?
आरोप सही तो कार्रवाई, गलत तो स्थिति स्पष्ट करे प्रशासन
यह मामला अब केवल कंपनी और किसी व्यक्ति के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। यदि कंपनी के आरोप सही हैं तो संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं यदि लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं तो संबंधित पक्ष को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए
किसी भी राजनीतिक दल के नाम का इस्तेमाल व्यक्तिगत या व्यावसायिक विवाद में किया जाना उचित है या नहीं, यह भी जांच का विषय होना चाहिए। प्रशासन की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शारदा ओसियम में वास्तविक विवाद क्या है और कंपनी पर दबाव बनाने के पीछे आखिर कारण क्या है







































































