रायपुर में सजा 1984 बैच की दोस्ती का रंग
आठवें मिलन समारोह में छलकी पुरानी यादें
मनेन्द्रगढ़। समय के साथ जिंदगी की राहें भले ही अलग हो जायें लेकिन बचपन और युवावस्था में बने दोस्ती के रिश्ते उम्र के हर पड़ाव पर अपनी गर्माहट बनाये रखते हैं। इसी आत्मीय रिश्ते और पुरानी यादों को फिर से जीवंत करने के लिये वर्ष 1984 बैच के मित्रों का आठवां मिलन समारोह 21 और 22 अगस्त को रायपुर स्थित मुहूर्त रिसॉर्ट में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। दो दिनों तक चले इस आयोजन में मित्रों ने पुराने दिनों को याद किया, एक दूसरे के सुख-दुख साझा किये और गीत संगीत, नृत्य और मनोरंजक खेलों के माध्यम से जमकर आनंद उठाया।
1984 बैच के मित्रों के इस मिलन की परंपरा वर्ष 2007 में शुरू हुई थी जो लगातार जारी है
अब तक शिवतराई, अमृतधारा, बांधवगढ़, कान्हा-किसली, ईब वैली, अचानकमार, सिरपुर और बिरौली जैसे विभिन्न दर्शनीय स्थलों पर मिलन समारोह आयोजित किये जा चुके हैं। इस वर्ष राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में अलग अलग शहरों और स्थानों से पहुंचे मित्रों ने भाग लेकर इस परंपरा को और यादगार बना दिया
ढोल-नगाड़ों की धुन के बीच चंदन तिलक लगाकर मित्रों का स्वागत किया गया और इसके साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पहले दिन परिचय और संस्मरण साझा करने का दौर चला जिसमें मित्रों ने बीते वर्षों की घटनाओं और साथ बिताये पलों को याद किया। दूसरे दिन गीत संगीत, नृत्य, गीतों की प्रस्तुतियों और विभिन्न मनोरंजक खेलों ने माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। लंबे अंतराल के बाद एक दूसरे से मिले मित्रों के बीच ऐसा अपनापन देखने को मिला मानो समय ने वर्षों की दूरी को पलभर में मिटा दिया हो
समारोह के दौरान शासकीय सेवा से 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले मित्र सी.के. लखेरा और इम्तियाज बक्स का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। दोनों ने अपने सेवाकाल के अनुभव और चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि वे एक जिम्मेदारी से जरूर मुक्त हो रहे हैं लेकिन दोस्तों के प्यार और स्नेह के बीच वे कभी रिटायर नहीं होंगे। इस दौरान उपस्थित मित्रों ने दोनों के स्वस्थ, सुखद और सक्रिय जीवन की कामना की। मिलन समारोह में दिल्ली से मनोज दुबे, दुर्ग से आलोक शिवहरे, कोलकाता से स्वजन सेन, भिलाई से विकास पात्रों, अंबिकापुर से ज्ञानेश श्रीवास्तव, बिलासपुर से अनिल अरोरा और दविंदर कालरा, कोरबा से शशांक चक्रवर्ती, चिरमिरी से सी.के. लखेरा, झगराखाण्ड से भानू घोष और मनेन्द्रगढ़ से सुशील ताम्रकार, गुरजीत सिंह खानूजा, काके, मुकेश अग्रवाल, प्रवीण निशि, इम्तियाज बक्स और श्याम सुंदर पोद्दार सहित मित्र शामिल हुए। कार्यक्रम का संयोजन आलोक शिवहरे, अनिल अरोरा और मनोज दुबे ने किया
संयोजक आलोक शिवहरे ने कहा कि बचपन और युवावस्था में बनी दोस्ती जीवन की सबसे खूबसूरत स्मृतियों में शामिल होती है। दोस्तों के साथ बिताया समय भले ही बीत जाये लेकिन उसकी यादें हमेशा साथ रहती हैं। अनिल अरोरा ने कहा कि कुछ पुराने दोस्त उम्र बढ़ने के साथ और भी खास हो जाते हैं। जब वे एक साथ मिलते हैं तो पुराने दिनों की यादें और अपनापन फिर से लौट आता है। मनोज दुबे ने कहा कि पुराने दोस्तों के साथ थोड़ी सी मुलाकात भी जिंदगी में नई ऊर्जा और जीने का जज्बा पैदा करती है। सभी मित्र एक दूसरे के सुख दुख में साथ खड़े रहते हैं और भविष्य में भी नियमित रूप से मिलते रहने का संकल्प लिया गया
मनेन्द्रगढ़ निवासी और रियूनियन टीम के सदस्य श्याम सुंदर पोद्दार ने कहा कि वक्त की धूल में कुछ रिश्ते खो जाते हैं लेकिन सच्चे दोस्त दिल में हमेशा रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल मित्रों का मिलन नहीं बल्कि वर्षों की अनुभूतियों, स्मृतियों, स्नेह और अपनत्व का ऐसा संगम है जिसकी याद सभी के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी। उन्होंने समारोह में अपने व्यस्त समय से समय निकालकर शामिल हुए सभी मित्रों के प्रति आभार व्यक्त किया साथ ही बताया कि वर्ष 2027 का अगला मिलन समारोह बिलासपुर-अमरकंटक के बीच स्थित सोनभद्र रिसॉर्ट में आयोजित किया जायेगा। दो दिनों तक चले इस आत्मीय आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि वर्षों का अंतराल और जीवन की व्यस्तताएं सच्ची दोस्ती को कमजोर नहीं कर सकतीं। मित्रों के इस मिलन में बीते दिनों की यादें भी थीं, वर्तमान का अपनापन भी और भविष्य में साथ बने रहने का संकल्प भी




























































