सावन महोत्सव में परोसे गए रसगुल्ले में संदिग्ध कीड़ा मिलने का आरोप पत्रकार के विरोध पर विवाद
गौतम टेंट हाउस की खाद्य व्यवस्था पर उठे सवाल जांच कर दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने की मांग
अनूपपुर। शहर के आस्था होटल में आयोजित सावन महोत्सव के दौरान नाश्ते में परोसे गए रसगुल्ले में कथित रूप से कीड़ा मिलने का मामला सामने आया है। घटना के बाद कार्यक्रम में मौजूद पत्रकार द्वारा आपत्ति जताए जाने पर खाद्य व्यवस्था संभाल रहे ठेकेदार पक्ष से विवाद होने का भी आरोप है। मामले ने सार्वजनिक आयोजनों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार नारी सर्वजन सुखाय सामाजिक संस्था द्वारा आस्था होटल में सावन महोत्सव का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में संस्था के सदस्यों के साथ अन्य आमंत्रित अतिथि एवं पत्रकार भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान नाश्ता परोसा जा रहा था। इसी दौरान रसगुल्ले के बर्तन में एक संदिग्ध वस्तु दिखाई दी जिसे उपस्थित पत्रकार ने कीड़ा होने का दावा करते हुए मौके पर आपत्ति दर्ज कराई। आरोप है कि खाद्य व्यवस्था से जुड़े गौतम टेंट हाउस के व्यक्ति ने इसे कीड़ा मानने से इनकार करते हुए कथित तौर पर मसाला बताया और उसे फेंक दिया। पत्रकार द्वारा इस पर दोबारा सवाल उठाने और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर विरोध करने पर ठेकेदार पक्ष द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने की बात भी सामने आई है।
सवाल—अगर कीड़ा नहीं था तो जांच के लिए सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि रसगुल्ले में मिली संदिग्ध वस्तु वास्तव में क्या थी यदि वह मसाला अथवा कोई सामान्य खाद्य पदार्थ था तो उसे तत्काल फेंकने के बजाय जांच के लिए सुरक्षित रखा जा सकता था। मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सार्वजनिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को भोजन अथवा नाश्ता परोसा जाता है। ऐसे में खाद्य सामग्री तैयार करने रखने और परोसने के दौरान साफ-सफाई तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। जरा सी लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग करे नमूने और लाइसेंस की जांच
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से अपेक्षा है कि शिकायत और उपलब्ध फोटो/अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जाए। साथ ही संबंधित कैटरिंग/टेंट व्यवसाय द्वारा खाद्य सामग्री तैयार एवं परोसने के लिए आवश्यक पंजीयन/लाइसेंस किचन की स्वच्छता खाद्य सामग्री के भंडारण तथा गुणवत्ता मानकों की भी जांच की जाए। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन या लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए लाइसेंस/पंजीयन के निलंबन अथवा निरस्तीकरण सहित जो भी वैधानिक कार्रवाई बनती हो वह की जाए। वहीं पत्रकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार के आरोप की भी जांच आवश्यक है। समाचार प्रतिनिधि द्वारा खाद्य गुणवत्ता पर सवाल उठाना विवाद का कारण बनने के बजाय जांच का विषय होना चाहिए। अब देखना होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सार्वजनिक आयोजनों में लोगों को परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं।


































