बैठकें नहीं, फिर भी पंचायत खाते से राशि निकासी? सकोला में सचिव-सरपंच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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बैठकें नहीं, फिर भी पंचायत खाते से राशि निकासी? सकोला में सचिव-सरपंच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

जमुना कोतमा। ग्राम पंचायत सकोला में पंचायत की नियमित बैठकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत के कई पंचों से बातचीत में यह बात सामने आई है कि उन्हें ग्राम पंचायत की नियमित बैठकों की सूचना नहीं दी जाती और कई पंचों के अनुसार जब से निर्वाचित हुए मतलब 2022 आज तक 2026 ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित नहीं की गई हैं। दूसरी ओर, पंचायत के खाते से विभिन्न कार्यों एवं मदों में राशि निकाले जाने की जानकारी सामने आने के बाद अब सचिव और सरपंच की कार्यप्रणाली तथा पंचायत की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 44(4) के अनुसार ग्राम पंचायत की बैठक कम-से-कम प्रत्येक माह एक बार बुलाई जाना आवश्यक है। वहीं धारा 44(5) के तहत पिछली बैठक से वर्तमान बैठक तक की आय-व्यय तथा चालू वित्तीय वर्ष की संचयी आय-व्यय की रिपोर्ट ग्राम पंचायत के समक्ष रखकर उस पर चर्चा की जानी है।

ग्राम पंचायत के बैठक में ही की ग्राम सभा के सभी प्रस्ताव पर कार्य किया जाता है
और ग्राम पंचायत का मतलब सरपंच , उप सरपंच , पंच और सचिव से मिल कर बनता है

पंचों को नहीं मिलती पंचायत के कामकाज और राशि की जानकारी

हमारे प्रतिनिधि द्वारा ग्राम पंचायत सकोला के कई पंचों से उनके व्यक्तिगत संपर्क नंबर पर बातचीत कर पूछा गया कि क्या ग्राम पंचायत की नियमित बैठकें होती हैं और क्या उन्हें पंचायत की आय-व्यय एवं विकास कार्यों की जानकारी दी जाती है।

वार्ड क्रमांक 12 के पंच राजू भारिया ने बताया कि उन्हें पंचायत में कितना पैसा आया और कितना पैसा निकाला गया, इसकी किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती। उनका कहना है कि वे पंचायत के निर्वाचित पंच हैं, लेकिन पंचायत की वित्तीय गतिविधियों की जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जाती। प्रत्येक माह पंचायत की बैठक होती उसकी जानकारी है नहीं है।

वहीं पंच चकोरिया भारिया ने दावा किया कि उन्हें पंचायत की बैठक के लिए रूप से नहीं बुलाया जाता। उनके अनुसार उन्हें केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर ही बुलाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि लगभग चार साल से ग्राम पंचायत की कोई नियमित बैठक नहीं हुई और सचिव द्वारा बैठक के संबंध में उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई।

इसी तरह वार्ड क्रमांक 8 के पंच रामेश्वर सिंह कंवर ने बताया कि उन्हें पंचायत की बैठकों और पंचायत के कामकाज के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना जाली हस्ताक्षर किए जाने की भी आशंका है। उन्होंने यह भी बताया कि सचिव कभी 15 दिन में तो कभी महीने में पंचायत में आते हैं।

बैठकें नहीं हुईं तो फिर पंचायत की राशि किस प्रक्रिया से निकली?

मामला इसलिए गंभीर हो जाता है क्योंकि एक तरफ पंच नियमित पंचायत बैठक नहीं होने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचायत के बैंक खाते से विभिन्न कार्यों एवं मदों में राशि निकाले जाने की जानकारी सामने आ रही है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पंचायत की नियमित बैठक ही नहीं हुई, तो पंचायत निधि से राशि निकासी से संबंधित प्रस्ताव किस बैठक में पारित हुए?

विकास कार्यों की स्वीकृति किस प्रक्रिया के तहत हुई? आय-व्यय का विवरण ग्राम पंचायत के बैठक समक्ष कब रखा गया और उस पर चर्चा कब हुई?
कितने बहुमत से रिजोल्यूशन पास हुआ

ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित होना आवश्यक था, तो संबंधित प्रस्ताव और कार्यवाही रजिस्टर में उसका रिकॉर्ड होना चाहिए। इसी तरह यदि किसी कार्य के लिए पंचायत निधि से भुगतान किया गया है, तो उसके पीछे संबंधित स्वीकृति, प्रस्ताव, बिल-वाउचर और भुगतान का रिकॉर्ड भी उपलब्ध होना चाहिए।

यदि बैठक के प्रस्ताव और बैंक खाते से किए गए भुगतान की तारीखों का मिलान कराया जाता है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि पंचायत निधि से किए गए भुगतान के पीछे विधिवत ग्राम पंचायत निर्णय मौजूद था या नहीं।
या सिर्फ सचिव या सरपंच ने दोनों निर्णय ले लेते है
अगर ऐसा है तो को पंचो को निर्वाचित करने के पैसो का खर्चा नहीं करना चाहिए

पंचों के बयानों और पंचायत खाते से राशि निकाले जाने की जानकारी के आधार पर वित्तीय अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और सक्षम अधिकारी की निष्पक्ष जांच के बाद ही किया जा सकता है।

यदि जांच में यह पाया जाता है कि पंचायत निधि से राशि बिना वैध प्रस्ताव, निर्धारित प्रक्रिया अथवा आवश्यक स्वीकृति के निकाली गई है, अथवा पंचायत के अभिलेखों में पंचों की उपस्थिति या हस्ताक्षर वास्तविकता से मेल नहीं खाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

चार साल से बैठक नहीं हुई तो पंचायत के फैसले कैसे हुए?

ग्राम पंचायत सकोला के मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

यदि पंचों के अनुसार वर्षों से नियमित पंचायत बैठकें नहीं हुईं, तो पंचायत के विकास कार्यों की स्वीकृति किसने दी?

यदि पंचायत खाते से राशि निकाली गई, तो उसके लिए प्रस्ताव किस बैठक में पारित हुआ?

यदि आय-व्यय की जानकारी पंचों को नहीं दी गई, तो पंचायत के समक्ष वित्तीय विवरण कब रखा गया?

और यदि किसी पंच के आरोप के अनुसार उसकी जानकारी के बिना हस्ताक्षर किए गए हैं, तो उन हस्ताक्षरों की सत्यता की जांच कब होगी?

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्राम पंचायत के पंचों और ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पिछले वित्तीय वर्षों से अब तक पंचायत की संपूर्ण आय-व्यय एवं बैंक लेन-देन की जांच कराई जाए।

साथ ही पंचायत की बैठक एवं प्रस्ताव रजिस्टर, उपस्थिति पंजी और बैंक खाते का मिलान कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पंचायत की राशि किस कार्य के लिए, किस प्रस्ताव के आधार पर, किसके आदेश पर और किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई।

यदि जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता या अभिलेखों में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब देखना यह है कि ग्राम पंचायत सकोला से जुड़े इन गंभीर सवालों पर जिला पंचायत अनूपपुर एवं संबंधित पंचायत विभाग के अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और जांच में पंचायत के अभिलेख आखिर क्या सच्चाई सामने लाते हैं।

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