15 साल से बदहाल सड़क और गंदे पानी में डूबा सकोला का वार्ड-3 व 4, स्वच्छ भारत अभियान पर उठे सवाल

---Advertisement---

15 साल से बदहाल सड़क और गंदे पानी में डूबा सकोला का वार्ड-3 व 4, स्वच्छ भारत अभियान पर उठे सवाल

नालियां नहीं बनीं, सड़क पर बह रहा गंदा पानी और पशुओं का मल-मूत्र; ग्रामीणों ने सरपंच पदमा सिंह सहायक सचिव रमेश विश्वकर्मा की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

जमुना कोतमा सकोला ग्राम पंचायत सकोला के वार्ड क्रमांक 3 और 4 में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब 15 वर्षों से सड़क और नाली निर्माण की मांग लगातार पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत और सीएम हेल्पलाइन तक की जाती रही, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। वर्तमान में सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, जमा गंदा पानी, दुर्गंध और पशुओं के मल-मूत्र के कारण लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार वार्ड क्रमांक 3 की सड़क लंबे समय से जर्जर है। बारिश और नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों तथा मोहल्ले का गंदा पानी सड़क पर जमा हो रहा है। कई स्थानों पर गहरे गड्ढों में दुर्गंधयुक्त पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते से गुजरने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं का मल-मूत्र भी सड़क और आसपास जमा होने से वातावरण में दुर्गंध बनी रहती है।

15 साल से मांग, फिर भी नहीं बनी नाली

ग्रामीणों का कहना है कि वार्ड क्रमांक 3 में नाली निर्माण और सड़क सुधार की मांग करीब 15 वर्षों से की जा रही है। कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें पंचायत प्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों को दी गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा केवल आश्वासन अथवा कागजी कार्रवाई तक मामला सीमित रह जाता है।

पंचायत के कामकाज पर ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरपंच पदम सिंह, सचिव सचिन निरंजन जायसवाल तथा सहायक सचिव रमेश विश्वकर्मा की भूमिका की जांच की मांग की है। ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया गया है कि पंचायत के विकास कार्यों में जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं देता, जबकि सरकारी राशि से संबंधित कार्यों की कागजी प्रक्रिया और भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कुछ ग्रामीणों ने सहायक सचिव रमेश विश्वकर्मा की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि उनके प्रभाव में कथित तौर पर केवल कागजी कार्रवाई कर कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि ग्रामीण अब पंचायत के पिछले वर्षों के निर्माण कार्यों, स्वीकृत राशि, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, भुगतान और मौके पर हुए वास्तविक कार्यों का उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराने की मांग कर रहे हैं।

कागजों में विकास या धरातल पर बदहाली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत क्षेत्र में सड़क, नाली और जल निकासी से जुड़े कार्यों के लिए पूर्व में राशि स्वीकृत हुई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। कौन-सा कार्य कब स्वीकृत हुआ, कितनी राशि जारी हुई, किस एजेंसी अथवा व्यक्ति द्वारा कार्य कराया गया और मौके पर कितना काम हुआ—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के पिछले कई वर्षों के विकास कार्यों का रिकॉर्ड निकलवाकर मौके पर जांच की जाए। यदि दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है और धरातल पर कार्य नहीं हुआ है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो इसकी भी स्थिति स्पष्ट कर ग्रामीणों को वास्तविकता से अवगत कराया जाए।

गंदे पानी से संक्रमण का खतरा

वार्डवासियों का कहना है कि लंबे समय से जमा गंदगी और दुर्गंधयुक्त पानी के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। सड़क किनारे पशुओं का मल-मूत्र और गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों तथा अन्य कीटों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और पंचायत प्रशासन से तत्काल सफाई, कीटनाशक छिड़काव और जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।

बड़े विवाद की आशंका, प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति और गंदे पानी के कारण आए दिन मोहल्ले में विवाद की स्थिति बनती है। रास्ते में जमा पानी और कीचड़ से आवागमन बाधित होने के कारण लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने जनपद पंचायत, जिला पंचायत एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि सकोला ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 3 और 4 का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। सड़क एवं नाली निर्माण की आवश्यकता का तकनीकी परीक्षण कराकर कार्य स्वीकृत किया जाए। साथ ही पंचायत में पिछले वर्षों में कराए गए निर्माण एवं विकास कार्यों की वित्तीय और तकनीकी जांच कराई जाए।

ग्रामीणों की मांग है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता, फर्जी कार्य पूर्णता, गलत भुगतान अथवा सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों से भी इन आरोपों पर उनका पक्ष लिया जाना आवश्यक है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

फिलहाल वार्ड क्रमांक 3 और 4 की बदहाल सड़क, जल निकासी और गंदगी की समस्या ने स्वच्छता एवं ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर स्थल निरीक्षण कर कार्रवाई करता है या फिर वर्षों से चली आ रही समस्या इसी तरह बनी रहती है

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

August 8, 2026

August 7, 2026

August 7, 2026

August 7, 2026

August 7, 2026

August 7, 2026

Leave a Comment