मीना बाजार में एंट्री के नाम पर हजारों रुपए की अवैध वसूली!
20 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क से जेब में डाका
महिलाओं-बच्चों का आर्थिक शोषण के साथ सुविधाएं नदारत, कार्रवाई की मांग
जमुना कोतमा। नगर के वार्ड क्रमांक-7 में संचालित डिजनीलैंड मेला में प्रतिदिन 30 से 40 हजार रुपए की अवैध वसूली को लेकर जमकर आक्रोश देखा जा रहा है। मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं और प्रवेश शुल्क के नाम पर कथित वसूली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिक लाला गुप्ता, दिनेश केवट, प्रहलाद गुप्ता सहित अन्य लोगों का का आरोप है कि मीना बाजार में एंट्री की आड़ में प्रत्येक व्यक्ति से 20 रुपए प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है और प्रतिदिन हजारों रुपए की राशि वसूली जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह शुल्क किस अनुमति के तहत लिया जा रहा है और इसकी वैधानिकता क्या है?
मेले में परिवार के साथ पहुंचने वाले लोगों में बड़ी संख्या महिलाए और बच्चों की होती है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति से अलग-अलग 20 रुपए लेना आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। इस कथित वसूली को लेकर प्रशासन से स्पष्ट जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि प्रवेश शुल्क लेने की अनुमति है तो उसकी रसीद, अनुमति पत्र, कर संबंधी विवरण को सार्वजनिक की जानी चाहिए।
मीना बाजार के नाम पर एंट्री शुल्क, आखिर किसकी अनुमति से?
मेले में प्रवेश के नाम पर प्रति व्यक्ति 20 रुपए लिए जा रहे हैं जो कि पूर्णता अवैध एवं गलत है। रसीद में किसी प्रकार का अनुमति एवं शुल्क विवरण स्पष्ट नहीं है।
महिलाओं का कहना हो कि 3 वर्ष तक के बच्चे का 20 रुपए लेना अनुचित है। मेला संचालक के पास किस विभाग की अनुमति है, इसका भी खुलासा होना चाहिए। इसकी जांच की जाए। यदि जांच में शुल्क वसूली नियमों के विपरीत पाई जाती है तो संबंधित संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मेला संचालन अनुमति निरस्त किया जाए
महिलाओं और बच्चों से वसूली पर फूटा लोगों का गुस्सा
मेले में मनोरंजन के लिए आने वाले परिवारों का कहना है कि बच्चों और महिलाओं सहित प्रत्येक व्यक्ति से 20 रुपए लिया जाना आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। एक परिवार के कई सदस्यों से अलग-अलग शुल्क लेने के बावजूद मेले में पेयजल, बारिश से बचने के लिए शेड व्यवस्था, अपातकालीन उपचार और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं
झूला हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए सवाल:
मेले में कुछ दिन पूर्व झूला टूटने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर पहले ही सवाल खड़े हो चुके हैं। बताया गया कि जमुना कॉलरी निवासी एक परिवार के सदस्य घायल हुए थे। घटना के बाद मेला प्रबंधन और प्रभावित परिवार के बीच विवाद की स्थिति बनने की बात भी सामने आई थी। प्रत्येक झूले की फिटनेस प्रमाणित होने के साथ क्या ऑपरेटर प्रशिक्षित हैं इसकी भी नियमता जांच होनी चाहिए।
पार्किंग से साइकिल चोरी ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल:
पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी वाहन चालकों ने सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि 3 दिन पूर्व एक साइकिल चोरी हो गई। इससे मेला परिसर की सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। इसके अलावा बारिश के मौसम में कई स्थानों पर खुले बिजली के तार किसी बड़े हादसे की आहट के रूप में देखी जा रही है
बारिश में भीगते और परेशान होते हैं बच्चे और महिलाएं:
बारिश के मौसम में मेले में आने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। शेड और सुरक्षित स्थान नहीं होने के कारण बारिश शुरू होते ही लोगों को इधर-उधर भागना पड़ता है। छोटे बच्चों, महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। आए दिन बारिश भी हो रही है
एसडीएम ने जांच कराने का दिया आश्वासन: मेला परिसर में भारी अव्यवस्थाएं एवं बदइंतजामी को लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोतमा टी. आर. नाग ने बताया कि उन्हें मेले की अव्यवस्थाओं की जानकारी नहीं थी। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को मामले की जांच के निर्देश देकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
अब देखना है कि एसडीएम के निर्देश के बाद जांच महज कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में मेला परिसर में पहुंचकर प्रवेश शुल्क, सुरक्षा व्यवस्था, झूलों की फिटनेस, फायर सेफ्टी, विद्युत सुरक्षा, पार्किंग और मूलभूत सुविधाओं की पूरी पड़ताल कर कार्यवाही की जाएगी















