आदिशक्ति कार्यकर्ता व सहायिका संघ का एटक में विलय, आंगनवाड़ी और सीमेंट श्रमिकों की एकता से संघर्ष को मिलेगी नई ताकत

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आदिशक्ति कार्यकर्ता व सहायिका संघ का एटक में विलय, आंगनवाड़ी और सीमेंट श्रमिकों की एकता से संघर्ष को मिलेगी नई ताकत

सतना में कार्यकर्ता सम्मेलन में 400 से अधिक कार्यकर्ता शामिल, श्रमिक अधिकारों और आंगनवाड़ी कर्मियों की मांगों पर तेज आंदोलन का ऐलान

सतना, 25 जुलाई। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के तत्वावधान में शनिवार को अमृत वाटिका सभागार, सतना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका एवं सीमेंट श्रमिकों का संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में आदिशक्ति कार्यकर्ता व सहायिका संघ ने अपनी पूरी कार्यकारिणी और सैकड़ों सदस्यों के साथ एटक में औपचारिक विलय (मर्जर) की घोषणा की। इस मौके पर 400 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और श्रमिक उपस्थित रहे तथा जोरदार तालियों के बीच नवागत सदस्यों का स्वागत किया गया।

सम्मेलन में एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश अध्यक्ष हरिद्वार सिंह तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक की प्रदेश महासचिव विभा पांडेय ने आदिशक्ति संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों को एटक की सदस्यता दिलाई। आदिशक्ति कार्यकर्ता व सहायिका संघ की अध्यक्ष शाहीन सिद्दीकी ने कहा कि एटक ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के अधिकारों की लड़ाई न्यायालय से लेकर आंदोलन तक मजबूती से लड़ी है। इसी विश्वास के साथ उनका संगठन एटक में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों के एक होने से आंदोलन को नई ताकत मिलेगी और कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया जाएगा।

प्रदेश महासचिव विभा पांडेय ने विलय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आदिशक्ति कार्यकर्ता व सहायिका संघ के शामिल होने से एटक पहले से अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की हर लड़ाई में कानूनी और मैदानी दोनों स्तर पर मजबूती से साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने सभी नई सदस्य बहनों का स्वागत करते हुए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

एटक के प्रदेश अध्यक्ष हरिद्वार सिंह ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सीमेंट श्रमिकों की एकता प्रदेश में श्रमिक आंदोलन की नई दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि एटक का संघर्षों का लंबा इतिहास रहा है और चारों लेबर कोड के विरोध में भी संगठन अग्रिम पंक्ति में खड़ा है। उन्होंने अल्ट्राटेक बेला सीमेंट प्लांट में ठेका श्रमिकों के शोषण का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि श्रमिकों से 16 से 20 घंटे तक कार्य कराया जाता है, ओवरटाइम का भुगतान नियमानुसार नहीं दिया जाता और सीमेंट वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन भी नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि जब श्रमिकों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया, लेकिन लगातार तीन माह तक चले आंदोलन के बाद प्रबंधन को श्रमिकों को वापस काम पर लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष की जीत है और संगठित आंदोलन से ही श्रमिकों को न्याय मिल सकता है।

एटक के प्रांतीय उप महासचिव राम सरोज कुशवाहा ने कहा कि आदिशक्ति संघ के एटक में विलय से सतना जिले में संगठन और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पदोन्नति, ग्रेच्युटी तथा बकाया एरियर दिलाने की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। साथ ही सीमेंट उद्योग के ठेका श्रमिकों को वेज बोर्ड के अनुसार वेतन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।

जिला सचिव प्रीति गौतम ने सम्मेलन में शामिल सभी कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि अब सभी बहनें एक मंच पर आकर अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करेंगी। नजराना ने कहा कि एटक में शामिल होने से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा और विश्वास मिला है तथा संगठन के संघर्षों का इतिहास प्रेरणादायक है।

सम्मेलन की अध्यक्षता अरुण तिवारी ने की। उन्होंने आदिशक्ति कार्यकर्ता व सहायिका संघ के एटक में विलय का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन की मजबूती ही श्रमिकों और आंगनवाड़ी कर्मियों की जीत की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहकर संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता कमलेंद्र सिंह, नीतू चौरसिया, जिला पंचायत सदस्य लालमणि त्रिपाठी सहित अनेक वक्ताओं ने भी संबोधित किया और श्रमिकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हर संघर्ष में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर शाहीन सिद्दीकी, मोनिका, रोशनी त्रिपाठी, नजराना, प्रीति गौतम, बसंती तिवारी, मधु श्रीवास्तव, धर्मेंद्र चौधरी, रमेश प्रजापति, आनंदपाल, आनंद सिंह, उत्तम पटेल, रामदास, सुशील सिंह, नरेंद्र मिश्रा, जमुना पटेल सहित बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं एवं सीमेंट उद्योग के श्रमिक उपस्थित रहे।

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