मानदेय में देरी से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बढ़ा आक्रोश, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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15 दिन में भुगतान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी, पूर्व विधायक गुलाब कमरो बोले- जनकल्याणकारी योजनाओं की रीढ़ हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

मनेन्द्रगढ़। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ ने लंबे समय से लंबित मानदेय और गरम भोजन मद की राशि के भुगतान की मांग को लेकर एमसीबी जिले के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ ने आरोप लगाया कि समय पर भुगतान नहीं होने से जिले की सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं आर्थिक परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल लंबित राशि जारी करने और भविष्य में निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।

संघ द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्यांश के रूप में 5,500 रुपये और केन्द्रांश के रूप में 4,500 रुपये सहित कुल 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। यह राशि उनके परिवार के भरण-पोषण का मुख्य आधार है लेकिन कई महीनों से भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में मई और जून 2026 का मानदेय अब तक जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा मार्च 2026 से जून 2026 तक गरम भोजन मद की राशि भी लंबित है। संघ का कहना है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिये पोषण संबंधी व्यवस्थाएं, रिकॉर्ड संधारण, सर्वे, टीकाकरण, गर्भवती और धात्री महिलाओं की निगरानी सहित अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन कार्यकर्ता और सहायिकाएं लगातार कर रही हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। संघ ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं केवल बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं हैं बल्कि कुपोषण नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण अभियान, पोषण ट्रैकर, शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा समय-समय पर मिलने वाले विशेष सर्वेक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रमों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद अल्प मानदेय और उसके भुगतान में देरी से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।

ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि प्रत्येक माह का मानदेय 1 से 5 तारीख के बीच नियमित रूप से जारी किया जाये, सभी लंबित मानदेय एवं गरम भोजन मद की राशि का तत्काल भुगतान कराया जाये और भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाया जाये ताकि कार्यकर्ताओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना ना करना पड़े। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिये बाध्य होंगी। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की होगी।

इस अवसर पर ट्रेड यूनियन काउंसिल छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष और पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और ग्रामीण परिवारों तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकार और प्रशासन का दायित्व है कि उन्हें प्रत्येक माह समय पर मानदेय उपलब्ध कराया जाये ताकि वे आर्थिक तनाव से मुक्त होकर पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने प्रशासन से मांगों पर शीघ्र संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने का आग्रह भी किया।

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