कलकत्ता हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अवैध कब्जाधारियों की ग्रेच्युटी से वसूला जाएगा पेनल रेंट, सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को मिली मजबूती
कोलकाता। सार्वजनिक उपक्रमों की आवासीय संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कंपनी आवास खाली किए बिना किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी एवं अन्य अंतिम देयकों का लाभ नहीं दिया जा सकता तथा अवैध कब्जे की अवधि का पेनल रेंट सीधे ग्रेच्युटी राशि से वसूला जा सकेगा।
न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा एवं न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) से जुड़े एक प्रकरण की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अवैध कब्जाधारियों को किसी भी प्रकार की कानूनी राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के भीतर कंपनी आवास खाली करे। साथ ही ईसीएल को अधिकार दिया गया कि वह बकाया पेनल रेंट, ब्याज तथा संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन कर उसकी वसूली सेवानिवृत्ति लाभों से कर सके। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आवास खाली होने तक अंतिम भुगतान रोका जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय कोल इंडिया एवं उसकी सहायक कंपनियों सहित सभी सार्वजनिक उपक्रमों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे सरकारी आवासों पर वर्षों से बने अवैध कब्जों को हटाने में मदद मिलेगी तथा सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी। निर्णय के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अवैध कब्जाधारियों के बीच हलचल देखी जा रही है।
यह फैसला सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और सरकारी राजस्व की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है




































