अमरकंटक में मां नर्मदा जी से मिलने आती हैं मां गंगा
26 मई गंगा दशहरा पर विशेष लेख — पंडित संदीप ज्योतिषी
संवाददाता — श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक — मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी
अमरकंटक में गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया जाता है । मान्यता है कि गंगा सप्तमी एवं गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मां गंगा जी गुप्त रूप से मां नर्मदा जी से मिलने अमरकंटक आती हैं । इस अद्भुत आध्यात्मिक मान्यता से क्षेत्र का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है ।
अमरकंटक निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि सनातन परंपरा में अधिकांश व्रत एवं पर्व शुद्ध मास में निर्धारित होते हैं किंतु इस वर्ष गंगा दशहरा अधि. ज्येष्ठ मास में पड़ रहा है । शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि , हस्त नक्षत्र एवं शुभ योग में मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था इसी कारण यह तिथि “गंगा दशहरा” के नाम से प्रसिद्ध हुई ।
उन्होंने बताया कि इस बार गंगा दशहरा पर दस विशेष शुभ संयोग बन रहे है जो दस प्रकार के पापों का नाश करने वाले माने गए हैं । इन शुभ योगों में ज्येष्ठ मास , शुक्ल पक्ष , दशमी तिथि , मंगलवार , हस्त नक्षत्र , गर करण , आनंद योग , कन्या राशि में चंद्रमा तथा वृषभ राशि में सूर्य की स्थिति विशेष मानी जा रही है ।
पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार गंगा दशहरा पर “दशविधि स्नान” का विशेष महत्व बताया गया है । इसमें दूध , दही , भस्म , मृतिका , गोमूत्र , सर्वौषधि , कुशोदक , गाय का घी , स्वर्ण मिश्रित जल आदि से स्नान का विधान है । मान्यता है कि इस दिन गंगा , नर्मदा सहित पवित्र नदियों में स्नान , दान , जप , तप , उपवास एवं पूजन करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं । इनमें तीन कायिक , चार वाचिक एवं तीन मानसिक पाप शामिल हैं ।
उन्होंने बताया कि पर्व के दिन स्नान के पश्चात भगवान शिव का गंध , पुष्प , धूप , दीप , नैवेद्य एवं फल से पूजन कर रात्रि जागरण करने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है ।
शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार मां गंगा जी गंगा दशहरा के अवसर पर मां नर्मदा जी से मिलने अमरकंटक आती हैं । इसी आस्था के साथ 26 मई 2026 को अमरकंटक एवं आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालु कपिलासंगम स्थान और नर्मदा नदी में पवित्र स्नान कर स्वयं को धन्य एवं पावन अनुभव करेंगे ।





































