भीषण गर्मी और शादी-ब्याह के सीजन के बीच भी सफल रही नेशनल लोक अदालत
195 में से 65 बिजली चोरी एवं विद्युत अनियमितता के प्रकरणों का हुआ आपसी समझौते से निराकरण, उपभोक्ताओं को मिली नियमानुसार छूट
अनूपपुर। भीषण गर्मी और शादी-ब्याह के व्यस्त मौसम के बावजूद आयोजित नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर त्वरित एवं सुलभ न्याय व्यवस्था की दिशा में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के निर्देशानुसार 09 मई 2026 को देशभर में आयोजित नेशनल लोक अदालत के तहत जिला न्यायालय परिसर अनूपपुर में भी विद्युत अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों का निराकरण किया गया। इस दौरान बिजली चोरी एवं अन्य विद्युत अनियमितताओं के मामलों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने आपसी समझौते के माध्यम से प्रकरणों का निपटारा कराया।
कार्यपालन अभियन्ता श्री अरुणेन्द्र प्रसाद मौर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय परिसर अनूपपुर में श्री नरेन्द्र पटेल, विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) की अदालत में आयोजित नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्य विद्युत अनियमितताओं से जुड़े कुल 195 लंबित प्रकरणों को प्रस्तुत किया गया, जिनमें से 65 प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामे के माध्यम से सफल निराकरण किया गया।
उन्होंने बताया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के अंतर्गत दर्ज विद्युत चोरी के मामलों एवं अन्य विद्युत अनियमितताओं से संबंधित प्रकरणों में निम्नदाब श्रेणी के घरेलू उपभोक्ताओं, समस्त कृषि उपभोक्ताओं, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू उपभोक्ताओं तथा 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को नियमानुसार विशेष छूट का लाभ भी प्रदान किया गया। इससे अनेक उपभोक्ताओं को राहत मिली और वे लंबित मामलों से मुक्त हो सके।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 14 मार्च 2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई थी। उस दौरान बिजली चोरी एवं अन्य विद्युत अनियमितताओं के कुल 332 लंबित प्रकरणों में से 151 मामलों का निराकरण आपसी समझौते के माध्यम से किया गया था। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि लगातार मिल रही सफलता से लोगों का विश्वास वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली की ओर बढ़ा है।
कार्यपालन अभियन्ता श्री मौर्य ने कहा कि नेशनल लोक अदालत आम नागरिकों को त्वरित, सरल और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। उन्होंने विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के अंतर्गत दर्ज प्रीलिटिगेशन प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों के निराकरण के लिए आगामी नेशनल लोक अदालतों में भी आगे आकर आपसी समझौते और राजीनामे के माध्यम से अपने प्रकरणों का निराकरण कराएं।
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल रही है। यही कारण है कि कठिन मौसम और सामाजिक व्यस्तताओं के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लेकर अपने मामलों का समाधान कराया।



































