मई दिवस पर बिलासपुर में गूंजा मजदूर एकता का स्वर चार लेबर कोड श्रमिक शोषण का औजार, संघर्ष ही एकमात्र रास्ता : एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिद्वार सिंह

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मई दिवस पर बिलासपुर में गूंजा मजदूर एकता का स्वर
चार लेबर कोड श्रमिक शोषण का औजार, संघर्ष ही एकमात्र रास्ता : एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिद्वार सिंह

बिलासपुर। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर बिलासपुर के राध्वेन्द्र हाल प्रांगण में ट्रेड यूनियन काउंसिल की अगुवाई में एक संयुक्त श्रमिक सभा का आयोजन किया गया। सभा में विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों, मजदूर नेताओं और बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लेकर मई दिवस के ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान श्रम परिस्थितियों और मजदूर एकजुटता की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह का ओजस्वी और संघर्षपूर्ण संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने मजदूर आंदोलन के इतिहास से लेकर वर्तमान श्रम नीतियों तक पर तीखा प्रहार करते हुए श्रमिक एकता का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा कि 1 मई 1886 का दिन दुनिया के मजदूर इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। इसी दिन मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए “8 घंटा काम, 8 घंटा आराम और 8 घंटा मनोरंजन” का ऐतिहासिक नारा बुलंद किया था। यह केवल नारा नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग के सम्मानजनक जीवन का मूल अधिकार था। उन्होंने कहा कि आज 140 वर्ष बाद भी मजदूरों को उन्हीं बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो यह साबित करता है कि पूंजीवादी व्यवस्था लगातार श्रमिक अधिकारों पर हमला कर रही है।

कामरेड हरिद्वार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि देश के औद्योगिक क्षेत्रों—नोएडा, मानेसर और पानीपत—में आज मजदूर आंदोलन का उभार इसी असंतोष का परिणाम है। वहां मजदूर लगातार इस मांग को लेकर संघर्षरत हैं कि 8 घंटे से अधिक काम कराने पर नियमानुसार दुगुनी मजदूरी दी जाए, श्रमिकों को बोनस मिले, श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं सुनिश्चित हों और ठेका प्रथा के नाम पर उनका शोषण बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि देश का श्रमिक वर्ग अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है और शोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार है।

हरिद्वार सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह श्रम सुधार नहीं, बल्कि “श्रमिक विरोधी कानून” हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन चारों लेबर कोड ने मालिकों और प्रबंधन को मजदूरों का शोषण करने का खुला लाइसेंस दे दिया है। इन कानूनों के लागू होने से काम के घंटे बढ़ेंगे, स्थायी रोजगार घटेगा, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा, यूनियन अधिकार कमजोर होंगे और मजदूरों का अमानवीय शोषण बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों को सरल बनाने के नाम पर मजदूरों की दशकों की लड़ाई से हासिल उपलब्धियों को खत्म किया जा रहा है।

एटक नेता ने कहा कि सरकार और कॉर्पोरेट गठजोड़ मजदूरों को सस्ती श्रमशक्ति में बदलना चाहता है, लेकिन देश का श्रमिक वर्ग इस साजिश को सफल नहीं होने देगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि मजदूरों के अधिकारों पर हमला जारी रहा तो देशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि सभी ट्रेड यूनियनें अपने वैचारिक मतभेद भुलाकर मजदूर हित में एकजुट हों और साझा संघर्ष का मजबूत मोर्चा बनाएं। मजदूर वर्ग की एकता ही शोषणकारी नीतियों का सबसे बड़ा जवाब है।

कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा कि मई दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। यह दिन शोषण के विरुद्ध संघर्ष, अधिकारों की रक्षा और श्रमिक सम्मान की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने मजदूरों से आह्वान किया कि वे संगठित हों, जागरूक हों और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करें।

सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी मई दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रमिक एकता, श्रम अधिकारों की रक्षा और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि आज जब श्रमिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं, तब मजदूर वर्ग को संगठित होकर अपने संवैधानिक और श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।

कार्यक्रम के अंत में मजदूर एकता, श्रमिक अधिकारों की रक्षा और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष का संकल्प लिया गया। सभा “मजदूर एकता जिंदाबाद”, “दुनिया के मजदूरों एक हो” और “श्रमिक विरोधी कानून वापस लो” जैसे नारों से गूंज उठी। मई दिवस पर आयोजित यह संयुक्त सभा बिलासपुर में श्रमिक एकजुटता और संघर्ष के नए संकल्प के रूप में देखी जा रही है।

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