झिलमिल जलाशय की नहरों से फूट रही खुशहाली की नई राह पुष्पराजगढ़ के खेतों तक पहुँचेगा खुशहाली का पानी, 900 से अधिक किसानों की बदलेगी तकदीर

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अनूपपुर 30 अप्रैल 2026/ अनूपपुर जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब कृषि विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर है। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्य से 914 किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला रखी जा रही है।

 

वर्षों से इस क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती या सीमित जल स्त्रोतों पर निर्भर थे। नहर प्रणाली की जर्जर स्थिति के कारण जल अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाता था, जिससे सिंचाई में बाधा आती थी। अब प्रशासनिक पहल से झिलमिल जलाशय के मुख्य नहर तथा माइनर नहर के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है।

 

करीब 1960.40 लाख रुपये की लागत से संचालित यह परियोजना पूर्ण होने पर 5.04 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय का जल व्यवस्थित रूप से खेतों तक पहुँच सकेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था में स्थायी सुधार होने की उम्मीद है।

 

यह परियोजना लगभग 905 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को सशक्त बनाते हुए क्षेत्र के कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अंतर्गत करीब 11 किलोमीटर लंबा सुदृढ़ नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे जल वितरण अधिक प्रभावी और समान रूप से संभव हो सकेगा।

 

इस योजना से सीधे तौर पर बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के 914 किसान परिवार लाभान्वित होंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि और आजीविका में स्थिरता आने की संभावना है।

 

कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली परियोजना की नियमित निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। उनके अनुसार मजबूत नहर प्रणाली ही खरीफ और रबी फसलों की बेहतर पैदावार सुनिश्चित कर सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार संभव है।

 

स्थानीय किसानों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह सहित कई कृषकों का कहना है कि नहरों के सुधार से अब अंतिम खेत तक पानी पहुँचने की समस्या समाप्त हो जाएगी, जिससे वे दोनों मौसमों में बेहतर खेती कर सकेंगे।

 

पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से प्रवाहित यह जल न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।

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