बरतराई खान में भू-अर्जन सर्वे पर विवाद: बिना नोटिस और ग्रामसभा अनुमति के कार्य का आरोप

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बरतराई खान में भू-अर्जन सर्वे पर विवाद: बिना नोटिस और ग्रामसभा अनुमति के कार्य का आरोप

जमुना-कोतमा/अनूपपुर। बरतराई खान अंतर्गत अमाड़ाण्ड–मलगा क्षेत्र में चल रही भू-अर्जन सर्वे कार्रवाई को लेकर विवाद तेज हो गया है। ग्राम पंचायत ने SECL प्रबंधन के खिलाफ विधिक सूचना (लीगल नोटिस) जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप है कि बिना ग्राम सभा की पूर्व सहमति और भू-स्वामियों को लिखित नोटिस दिए बिना सर्वे कार्य कराया जा रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

ग्राम पंचायत का कहना है कि SECL द्वारा कोयला क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत अधिग्रहित भूमि पर नियमों की अनदेखी करते हुए सर्वे कराया जा रहा है, जो विधि के विपरीत और दंडनीय है। पंचायत ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 (LARR Act) तथा मध्यप्रदेश पेसा नियम, 2022 के प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।

नोटिस में कहा गया है कि LARR Act के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) और ग्राम सभा की सहमति जरूरी है। वहीं पेसा नियम, 2022 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का सर्वे, भूमि उपयोग परिवर्तन या संसाधनों से जुड़ा कार्य प्रतिबंधित है।

ग्राम पंचायत ने यह भी दोहराया कि ग्राम सभा को स्थानीय संसाधनों—भूमि, जल, वन और परिसंपत्तियों के संरक्षण व प्रबंधन का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी भी परियोजना से पहले ग्राम सभा की जानकारी, परामर्श और लिखित सहमति अनिवार्य है।

पंचायत की प्रमुख मांगें:

ग्राम सभा की पूर्व लिखित सहमति के बिना चल रहे सभी सर्वे कार्य तत्काल बंद किए जाएं।

अधिग्रहित भूमि पर स्थित पेड़, मकान, गोदाम, दुकान, टीन शेड आदि सभी परिसंपत्तियों का समुचित आकलन कर उचित मुआवजा तय किया जाए।

सर्वे कार्य ग्राम सभा की उपस्थिति में, रिकॉर्डिंग और पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराया जाए।

केवल पेड़ों का सर्वे कर मुआवजा निर्धारित करने की प्रक्रिया को अमान्य बताया गया है।

मामले में एक गंभीर आरोप भी सामने आया है कि कंपनी के एक अधिकारी की मिलीभगत से कुछ भू-स्वामियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अलग से पेड़ों का सर्वे किया जा रहा है। इससे अन्य लोगों का ध्यान भटकाकर अधूरे निर्माण कार्य (जैसे फर्श आदि) करने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे SECL को करोड़ों रुपये की संभावित हानि होने की आशंका जताई गई है।

ग्राम पंचायत ने चेतावनी दी है कि यदि बिना सूचना और सहमति के सर्वे कार्य जारी रहता है, तो इसे मौके पर ही रोका जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन की होगी। साथ ही, इसे LARR Act, 2013 और पेसा नियम, 2022 का उल्लंघन मानते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, अनूपपुर को भी भेजी जा रही है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

निष्कर्ष: बरतराई खान क्षेत्र में भू-अर्जन सर्वे को लेकर ग्राम पंचायत और SECL के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस विवाद के केंद्र में ग्राम सभा के अधिकार, कानूनी प्रक्रिया का पालन और पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उभरकर सामने आए हैं

 

 

 

बरतराई खान में भू-अर्जन सर्वे पर बवाल: ग्रामसभा की अनुमति बिना सर्वे का आरोप, SECL को कानूनी नोटिस की तैयारी

जमुना-कोतमा/अनूपपुर। बरतराई खान अंतर्गत अमाड़ाण्ड–मलगा क्षेत्र में चल रही भू-अर्जन सर्वे कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत ने प्रबंधन के खिलाफ विधिक नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंचायत का आरोप है कि बिना ग्रामसभा की पूर्व सहमति और भू-स्वामियों को लिखित सूचना दिए सर्वे कराया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है।

पंचायत के अनुसार, कोयला क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत अधिग्रहित भूमि पर भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। वहीं और के प्रावधानों की अनदेखी गंभीर उल्लंघन है। नियमों के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) और ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य बताई गई है, जबकि अनुसूचित क्षेत्रों में बिना अनुमति सर्वे या भूमि उपयोग परिवर्तन प्रतिबंधित है।

ग्राम पंचायत ने मांग रखी है कि बिना सहमति चल रहे सभी सर्वे कार्य तत्काल बंद किए जाएं, परिसंपत्तियों—जैसे पेड़, मकान, दुकान व अन्य संरचनाओं—का समुचित आकलन कर उचित मुआवजा तय किया जाए तथा पूरी प्रक्रिया ग्रामसभा की उपस्थिति और पारदर्शिता के साथ संपन्न हो। केवल पेड़ों का सर्वे कर मुआवजा तय करने की प्रक्रिया को भी पंचायत ने अमान्य बताया है।

मामले में यह आरोप भी उभरा है कि कंपनी के एक अधिकारी की मिलीभगत से कुछ भू-स्वामियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अलग से सर्वे कराया जा रहा है, जिससे अन्य लोगों को गुमराह कर अधूरे निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इससे कंपनी को करोड़ों की संभावित हानि की आशंका जताई गई है।

पंचायत ने चेतावनी दी है कि यदि बिना अनुमति सर्वे जारी रहा तो उसे मौके पर रोका जाएगा और इसकी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। मामले की प्रति जिला कलेक्टर अनूपपुर को भेजी जा रही है, जिससे प्रशासनिक हस्तक्षेप की उम्मीद जताई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम से बरतराई खान क्षेत्र में ग्राम पंचायत और SECL के बीच टकराव की स्थिति स्पष्ट हो गई है, जहां ग्रामसभा के अधिकार, कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।

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