पुश्तैनियों से पी रहे केवई नदी का पानी, व्यर्थ नहीं जाने देंगे अपनी जवानी : कामरेड राम बहादुर पाव

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स्थानीय युवाओं को रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और मजदूरी दर लागू करने की मांग, अन्यथा शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी

 

अनूपपुर

क्षेत्र की केवई नदी और स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर कामरेड राम बहादुर पाव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लगभग 15 वर्ष पूर्व ऊर्जा क्षेत्र में कार्य करने वाली उद्योग डेवलपमेंट कंपनी हमारे गांव मड़होली (कोठी) के समीप जीवनदायिनी केवई नदी के किनारे बसे ग्राम मड़होली (उमरदा) क्षेत्र में आई थी उस समय कंपनी ने क्षेत्र के किसानों की लगभग 1000 एकड़ कृषि भूमि औने-पौने दामों में लेकर उद्योग स्थापित करने का आश्वासन दिया था

 

कामरेड पाव के अनुसार उस दौरान किसानों को यह भरोसा दिलाया गया था कि प्रभावित किसानों को फसल नुकसान के साथ आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा तथा उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, निशुल्क चिकित्सा, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही क्षेत्र के युवाओं को उद्योग में रोजगार देने का भी वादा किया गया था

 

उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद कंपनी ने काम बंद कर दिया और जमीनों की देख-रेख के लिए केवल एक-दो कर्मचारियों को छोड़कर क्षेत्र से पलायन कर गई। इसके कारण आसपास के लगभग चार-पांच गांव—छतई, मड़होली, उमरदा और मंटोरिया के किसानों को ठगा हुआ महसूस होने लगा। जिन युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, आज वे सभी युवक बुढ़ापे की दहलीज पर पहुंच रहे हैं, लेकिन रोजगार का सपना अधूरा ही रह गया।

 

कामरेड राम बहादुर पाव ने आगे कहा कि लगभग दस वर्ष बाद उसी भूमि पर एक नई ऊर्जा कंपनी द्वारा अडानी पावर प्लांट के विस्तार का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन आज तक प्रभावित गांवों के किसानों और निवासियों से कोई संपर्क नहीं किया गया और न ही उन्हें किसी प्रकार की सुविधा या लाभ की जानकारी दी गई है। युवाओं को रोजगार नहीं मिला और क्षेत्र के लोगों को किसी भी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है।

 

उन्होंने बताया कि इस पूरे क्षेत्र के किसानों और पशुओं के लिए केवई नदी ही पानी का एकमात्र सहारा है, जिसके पानी से खेती-किसानी और पशुपालन चलता है। अब इस नदी के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। कामरेड पाव ने कहा कि उन्होंने कई बार कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत करने का प्रयास किया, ताकि क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं का समाधान निकल सके, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उद्योग के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग केवल इतनी है कि जब इतना बड़ा पावर प्लांट क्षेत्र में लग रहा है तो स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि यहां सैकड़ों की संख्या में अन्य राज्यों से मजदूर आकर काम कर रहे हैं, जबकि स्थानीय युवाओं को काम तक नहीं दिया जा रहा।

 

कामरेड पाव ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के आदिवासी युवाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। जब वे रोजगार की उम्मीद में फैक्ट्री पहुंचते हैं तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “तुम लोकल हो, तुम्हें काम पर नहीं रखेंगे।” उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद दुखद है, जबकि जिला अनूपपुर आदिवासी बहुल क्षेत्र है और यहां के लोगों की जीविका का मुख्य साधन मजदूरी ही है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के आने के बाद आदिवासी समुदाय के लोगों का विभिन्न तरीकों से शोषण हो रहा है। खेती प्रभावित हो रही है और हवा-पानी के प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके सम्मान के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

 

कामरेड राम बहादुर पाव ने जिला कलेक्टर अनूपपुर से मांग की है कि आदिवासी समाज के सम्मान की रक्षा करते हुए स्थानीय युवाओं को फैक्ट्री में मजदूरी का कार्य दिलाया जाए। साथ ही मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित कुशल, अकुशल और उच्च कुशल मजदूरों की मजदूरी दर के अनुसार भुगतान सुनिश्चित कराया जाए और कंपनी को इस दिशा में निर्देशित किया जाए।

 

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र के लोग शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

 

प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि क्षेत्र के आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएं

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